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उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट कमेटी सख्त, हर जिले को बनाना होगा ‘जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट’

अगस्त तक 1480 सड़क दुर्घटनाओं में 884 लोगों की मौत, 1626 घायल; देहरादून, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल सबसे अधिक प्रभावित

देहरादून, 5 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली जनहानि को लेकर सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी ने गंभीर रुख अपनाया है। सोमवार को सेवानिवृत्त न्यायाधीश एवं सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन, संबंधित विभागों के अधिकारियों तथा सभी जिलाधिकारियों के साथ सड़क सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में दुर्घटनाओं की रोकथाम, प्रभावी प्रवर्तन, सड़क इंजीनियरिंग, जनजागरूकता और दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में सामने आया कि वर्ष 2026 में अगस्त तक उत्तराखंड में 1480 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 884 लोगों की मौत हुई और 1626 लोग घायल हुए। जनपदवार स्थिति में देहरादून, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल में दुर्घटनाओं की संख्या और जनहानि अधिक पाई गई।

इन चार जिलों में देहरादून में 131, ऊधमसिंह नगर में 229, हरिद्वार में 213 और नैनीताल में 104 लोगों की मृत्यु हुई। वहीं घायलों की संख्या क्रमशः 322, 338, 279 और 334 रही। समीक्षा में यह भी पाया गया कि शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में होने वाली दुर्घटनाओं में जनहानि अधिक हो रही है।

हर जिले को ‘जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट’ बनाने के निर्देश

जस्टिस सप्रे ने राज्य के प्रत्येक जिले को ‘शून्य मृत्यु दर वाला जिला’ यानी Zero Fatality District बनाने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए। इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।

बिना हेलमेट और लाइसेंस वालों की संस्थानों में नो एंट्री।,,सरकारी कर्मचारियों और सरकारी संस्थानों में कार्यरत कार्मिकों को मोटर वाहन कानूनों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए। इसके तहत ‘No Helmet-No Entry’, ‘No Entry Without Driving Licence’ और ‘No Entry Without Insurance’ जैसी व्यवस्थाओं को लागू करने पर जोर दिया गया। यही व्यवस्था स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए भी लागू कराने को कहा गया।

ड्राइविंग लाइसेंस से पहले कंप्यूटराइज्ड टेस्ट ,,सड़क सुरक्षा के लिए चालकों की दक्षता को महत्वपूर्ण मानते हुए सभी परिवहन कार्यालयों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक स्थापित करने का काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए, ताकि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से पहले कंप्यूटराइज्ड आधार पर चालकों की परीक्षा हो सके।

चारधाम मार्गों पर कैमरों की निगरानी ,,चारधाम यात्रा मार्गों पर नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर शिकंजा कसने के लिए ANPR कैमरों की स्थापना के निर्देश दिए गए। वर्तमान में लगे ANPR कैमरों के माध्यम से चिन्हित किए जा रहे ट्रैफिक उल्लंघनों में अन्य अभियोगों को भी शामिल करने को कहा गया।

चारधाम मार्गों पर CSR के माध्यम से ट्रामा सेंटर और चालक विश्राम गृह स्थापित करने की संभावनाओं का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने को भी कहा गया।

गड्ढों और खराब सड़कों पर तय होगी जिम्मेदारी ,,सड़क पर बने गड्ढों यानी पॉटहोल्स को भी दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण मानते हुए उनके समयबद्ध सुधार के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही संबंधित विभाग या हितधारक की जिम्मेदारी निर्धारित करने को कहा गया।

हर दुर्घटना का होगा गहन विश्लेषण जिले में होने वाली प्रत्येक सड़क दुर्घटना का विस्तृत विश्लेषण करने के निर्देश दिए गए। इसमें दुर्घटना के वास्तविक कारण, मृत्यु के कारण, भविष्य में ऐसी दुर्घटना रोकने के उपाय और उन उपायों के समयबद्ध क्रियान्वयन को शामिल किया जाएगा।

जिला सड़क सुरक्षा समितियों की बैठक हर माह अनिवार्य रूप से आयोजित करने और बैठक में लिए गए निर्णयों की कार्रवाई रिपोर्ट MoRTH पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए।

सड़क सुरक्षा के लिए 4E पर जोर जस्टिस सप्रे ने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए 4E—Engineering, Enforcement, Education और Emergency Care को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं को कम करने के लिए इन चारों क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है और सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करना होगा।

पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए SOP बनेगी ,,सुप्रीम कोर्ट द्वारा पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर हाल में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में नियमावली/एसओपी समयबद्ध रूप से तैयार करने तथा उसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट कमेटी को भेजने के निर्देश दिए गए।

पर्वतीय क्षेत्रों में क्रैश बैरियर अनिवार्य उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में वाहन के गहरी खाई में गिरने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए सभी आवश्यक मार्गों पर क्रैश बैरियर लगाने को अनिवार्य किए जाने पर जोर दिया गया। अवशेष मार्गों पर क्रैश बैरियर लगाने के लिए समयसीमा तय करने तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि लगाए जाने वाले क्रैश बैरियर IRC मानकों के अनुरूप हों। गोल्डन ऑवर में मिले तत्काल उपचार दुर्घटना के बाद शुरुआती समय को जीवन बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानते हुए गोल्डन ऑवर में घायल तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर करने के निर्देश दिए गए।।इसके अलावा आवारा पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार को समग्र नीति तैयार करने को कहा गया। बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्धन, सचिव एवं आयुक्त परिवहन रविनाथ रमन, सचिव वित्त रणवीर सिंह चौहान, निदेशक यातायात कृष्ण कुमार सहित परिवहन, गृह, शिक्षा, चिकित्सा, लोक निर्माण, वन, शहरी विकास, एनएचएआई, बीआरओ और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। सभी जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों तथा परिवहन विभाग के अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया।

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