उत्तराखण्ड
आस्था की सुगंध और भक्ति की मिठास से महका 79वां निरंकारी संत समागम


सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने दिया प्रेम, सेवा, समर्पण और मानव एकत्व का संदेश
समालखा (हरियाणा), 24 अक्टूबर। हरियाणा के समालखा स्थित निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित चार दिवसीय 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का प्रथम दिन आस्था, भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना के दिव्य वातावरण में संपन्न हुआ। देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने समागम स्थल को भक्ति, सद्भावना और मानव एकता के भावों से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि परमात्मा के एहसास से जीवन में जागृति का भाव निरंतर बना रहता है।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने प्रवचनों में ब्रह्मज्ञान, प्रेमाभक्ति और मानवीय एकत्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ब्रह्मज्ञान जागृति का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक नई आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत है। वास्तविक जागृति तभी सार्थक होती है, जब मनुष्य जीवन के प्रत्येक क्षण में निराकार परमात्मा के एहसास के साथ प्रेम, विश्वास, विनम्रता और सहजता को अपने आचरण का हिस्सा बनाए।
उन्होंने कहा कि सत्संग में शामिल होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां से प्राप्त शिक्षाओं को अपने जीवन और व्यवहार में उतारना आवश्यक है। सेवा और समर्पण तभी सार्थक हैं, जब वे दिखावे से दूर रहकर सच्चे भावों के साथ किए जाएं। दूसरों के प्रति प्रेम रखना, निंदा और अहंकार से बचना तथा अपनी वाणी और कर्मों से अच्छाई को प्रकट करना ही वास्तविक आध्यात्मिक जागृति की पहचान है।
सतगुरु माता जी ने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि परमात्मा द्वारा प्रदान किए गए साधनों का उपयोग मानवता की सेवा और परोपकार के लिए किया जाए। जीवन की परिस्थितियां कैसी भी हों, मनुष्य को अपने भीतर शांति, सहजता और विश्वास बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कामना की कि सभी श्रद्धालुओं के जीवन में सेवा, सुमिरन और सत्संग के प्रति समर्पण निरंतर बना रहे तथा ब्रह्मज्ञान का दिव्य प्रकाश उनके जीवन को प्रेम, शांति और भक्ति से आलोकित करता रहे।
समागम में विभिन्न संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों से आए श्रद्धालुओं का मिलन मानव एकता, आपसी प्रेम और सद्भावना का संदेश देता नजर आया।
भव्य सेवादल रैली ने दिया अनुशासन और निःस्वार्थ सेवा का संदेश
79वें निरंकारी संत समागम के दूसरे दिन का शुभारंभ भव्य सेवादल रैली के साथ हुआ। इसमें भारत के विभिन्न राज्यों और विदेशों से पहुंचे हजारों सेवादल भाई-बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैली के दौरान शारीरिक व्यायाम, स्किट, खेलकूद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और मिशन की शिक्षाओं पर आधारित लघु नाटिकाओं के माध्यम से अनुशासन, सहयोग, समर्पण और निःस्वार्थ सेवा का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने सेवादल के सदस्यों और उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि सेवा केवल किसी जिम्मेदारी या ड्यूटी को निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन का अभिन्न अंग है। सच्चा सेवादार वही है, जो निरंकार को अपने हृदय में बसाकर हर परिस्थिति में मानवता के कल्याण के लिए तत्पर रहता है।
उन्होंने कहा कि निरंकार पर अटूट विश्वास रखते हुए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए तथा तन, मन और धन को परोपकार में लगाकर जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। निःस्वार्थ सेवा मनुष्य को विनम्रता, प्रेम और आपसी सहयोग की भावना से जोड़ती है।
इससे पूर्व सतगुरु माता जी के करकमलों द्वारा शांति और एकत्व के प्रतीक मिशन के श्वेत ध्वज का ध्वजारोहण किया गया। इस दौरान संत निरंकारी सेवादल के मुख्य संचालक श्री एस.के. जुनेजा ने विश्वभर से आए सेवादल स्वयंसेवकों की ओर से सतगुरु माता जी के चरणों में श्रद्धा अर्पित की और सभी के लिए पावन आशीर्वाद की कामना की।
समागम के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया गया कि सच्ची भक्ति केवल आध्यात्मिक अनुभूति तक सीमित नहीं, बल्कि उसका वास्तविक स्वरूप मानवता की सेवा, आपसी प्रेम, विनम्रता और सद्भावपूर्ण व्यवहार में दिखाई देता है।





