उत्तराखण्ड
अहंकार का नाश और भक्त कल्याण का संदेश दे गई नारद मोह की लीला

कुमाऊं की प्राचीनतम दिन की रामलीला में हुआ रावण जन्म और नारद मोह प्रसंग का मंचन
रावण जन्म और नारद मोह की लीला
हल्द्वानी। कुमाऊं की प्राचीनतम दिन की रामलीला में गुरुवार को रावण जन्म एवं नारद मोह की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। व्यास पुष्कर दत्त शास्त्री के निर्देशन में मंचित इस प्रसंग में भगवान की माया, भक्त के कल्याण और अहंकार के विनाश का सुंदर संदेश प्रस्तुत किया गया। लीला के दौरान कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
नारद मोह प्रसंग में दर्शाया गया कि भगवान अपने भक्तों के कल्याण के लिए किस प्रकार माया का विस्तार करते हैं और उनके भीतर उत्पन्न अहंकार को दूर करते हैं। व्यास पुष्कर दत्त शास्त्री ने प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि नारद मुनि के अहंकार को दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने विश्वमोहिनी का सृजन किया और उनका स्वयंवर आयोजित किया।
विश्वमोहिनी के अनुपम रूप को देखकर नारद मुनि का वैराग्य विचलित हो गया। वे स्वयंवर में विश्वमोहिनी को प्राप्त करने के लिए भगवान विष्णु से अपना रूप सुंदर बनाने का आग्रह करते हैं। भगवान ने उन्हें ‘हरि’ का रूप प्रदान किया, लेकिन यहां ‘हरि’ का अर्थ भगवान का स्वरूप नहीं बल्कि वानर का रूप था।
स्वयंवर में पहुंचने पर जब नारद मुनि को अन्य लोगों से अपने वानर रूप के बारे में पता चला तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप देते हुए कहा कि जिस वानर का रूप देकर आपने मेरा उपहास कराया है, एक दिन इन्हीं वानरों की सहायता आपको भी लेनी पड़ेगी। यही श्राप आगे चलकर रामायण की कथा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जब भगवान श्रीराम की सहायता के लिए हनुमान सहित वानर सेना उनके साथ खड़ी होती है।
लीला के माध्यम से कलाकारों ने यह संदेश दिया कि अहंकार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है और भगवान अपने भक्तों का कल्याण करने के लिए समय-समय पर अपनी लीला के माध्यम से उन्हें सही मार्ग दिखाते हैं।
मंचन में भगवान विष्णु का पात्र कुनाल पाण्डेय, नारद मुनि का पात्र यश मिश्रा तथा रावण का पात्र निभाया गया। कलाकारों के संवाद, अभिनय और मंच प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा।
इस अवसर पर व्यास पूजन भी श्रद्धापूर्वक किया गया। प्रदीप जनोटी, महेंद्र बोरा, पं. विवेक शर्मा, सुशील शर्मा, रोहित खैरवार, सचिन जायसवाल एवं यश गुप्ता ने व्यास पूजन किया। व्यास मंच का संचालन अतुल अग्रवाल ने किया।
रामलीला संचालन समिति की ओर से मीडिया प्रभारी भवानी शंकर नीरज ने बताया कि रामलीला के आगामी प्रसंगों में भी धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।





















