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उत्तराखण्ड

अब उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में होगी प्राचीन भारतीय संचार व्यवस्था और एआई आधारित मीडिया की पढ़ाई

 

हल्द्वानी 7 अगस्त। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं मीडिया अध्ययन विद्याशाखा की अध्ययन बोर्ड (बीओएस) की महत्वपूर्ण बैठक निदेशक प्रो. राकेश चन्द्र रयाल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में बाह्य विषय विशेषज्ञों ने ऑनलाइन माध्यम से प्रतिभाग किया। इस दौरान एमए पत्रकारिता एवं जनसंचार (एमएजेएमसी) कार्यक्रम की संपूर्ण पाठ्य संरचना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में वर्तमान समय की मीडिया आवश्यकताओं, नई शिक्षा नीति (एनईपी) तथा मीडिया उद्योग में तेजी से हो रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए एमएजेएमसी कार्यक्रम के व्यापक पुनर्गठन एवं अद्यतन पर सहमति बनी। कार्यक्रम को 80 क्रेडिट के अनुरूप नया स्वरूप प्रदान करने तथा सभी सेमेस्टरों की विषयवस्तु को समकालीन मीडिया परिदृश्य के अनुरूप विकसित करने की संस्तुति की गई।

प्राचीन भारतीय संचार परंपरा के साथ एआई की पढ़ाई

नई पाठ्य संरचना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता चौथे सेमेस्टर में ‘प्राचीन भारतीय संचार व्यवस्था’ (Ancient Indian Communication System) और ‘एआई और मीडिया’ (AI and Media) जैसे नए पाठ्यक्रमों को शामिल किया जाना है। इससे विद्यार्थियों को एक ओर भारत की प्राचीन संचार परंपराओं, ज्ञान एवं संचार प्रणालियों को समझने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित आधुनिक मीडिया तकनीकों और उनके प्रभावों का अध्ययन कर सकेंगे।

बैठक में मीडिया के उभरते क्षेत्रों को भी पाठ्यक्रम में प्रमुखता देने पर जोर दिया गया। इसमें डिजिटल पत्रकारिता, नई संचार तकनीक, मीडिया कानून एवं नैतिकता, साइबर मीडिया, समकालीन पत्रकारिता, मीडिया अनुसंधान तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण जैसे विषयों को अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करने का निर्णय लिया गया।

नई पाठ्य संरचना का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक पत्रकारिता के साथ-साथ डिजिटल एवं एआई आधारित मीडिया के बदलते परिवेश के लिए तैयार करना है। पाठ्यक्रम की इकाइयों का पुनर्संरचन इस प्रकार किया गया है कि विद्यार्थियों को मीडिया क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों के साथ ही रोजगार एवं करियर के नए अवसरों की जानकारी और व्यावहारिक समझ भी मिल सके।

विशेषज्ञों ने बताया भविष्य उन्मुख पाठ्यक्रम

बैठक में शामिल विषय विशेषज्ञों ने नई पाठ्य संरचना की सराहना करते हुए इसे भविष्य उन्मुख, रोजगारपरक और मीडिया उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बताया। बैठक में एमएजेएमसी कार्यक्रम के लिए अध्ययन सामग्री के लेखन हेतु विषय विशेषज्ञों के नामों पर भी विचार-विमर्श किया गया तथा आवश्यक संस्तुतियां प्रदान की गईं।

अध्यक्षता करते हुए प्रो. राकेश चन्द्र रयाल ने कहा कि मीडिया शिक्षा तेजी से बदल रही है। ऐसे समय में विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित कराना बेहद आवश्यक है। नया पाठ्यक्रम इसी सोच के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलते मीडिया परिदृश्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम बनाना है, ताकि वे भविष्य की मीडिया चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

बैठक में बाह्य विषय विशेषज्ञ के रूप में भारतीय जनसंचार के प्रोफेसर डॉ. प्रमोद कुमार, प्रो. महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा, राजस्थान के प्रो. सुबोध कुमार तथा दून विश्वविद्यालय के प्रो. राजेश कुमार ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।

विश्वविद्यालय की इस पहल से पत्रकारिता एवं जनसंचार के विद्यार्थियों को भारतीय संचार परंपरा से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल मीडिया और नई संचार तकनीकों तक एक व्यापक एवं आधुनिक अध्ययन का अवसर मिलेगा।

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