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उत्तराखण्ड

पांच प्यारों कि ‌अगुवाई में गुरुग्रंथ साहब को सचखंड से दरबार साहब में सुशोभित किया गया,

बोले सो नियाल सत श्री अकाल के जयकारे की गूंज के साथ सिख रेजिमेंट ने एवं सिख संगत के साथ श्री हेमकुंड साहिब के कपाट खुले-संगत की भीड़, गंगोत्री-यमुनोत्री उत्तराखंड चारधाम यात्रा में शुरू श्री हेमकुंड साहित के कपाट रविवार सुबह को पांच प्यारों कि ‌अगुवाई में गुरुग्रंथ साहब को सचखंड से दरबार साहब में सुशोभित किया गया, जिसके बाद दर्शन भी शुरू हो गया। पहले दिन लगभग साढे चार हजार सिख सगत ने श्री हेमकुंड साहिब में दर्शन किए चारधाम यात्रा के बाद आज रविवार को श्री चमोली जिले में स्थित हेमकुंड साहिब के कपाट भी दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। तीर्थ यात्रियों की भारी संख्या के बीच गुरुद्वार के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए हैं। आपको बता दें कि 30 मई को गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो गया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री हेमकुंड साहित के कपाट रविवार सुबह को पांच प्यारों कि ‌अगुवाई में गुरुग्रंथ साहब को सचखंड से दरबार साहब में सुशोभित किया गया, जिसके बाद दर्शन भी शुरू हो गया। पहले दिन लगभग साढे चार हजार तीर्थ यात्री हेमकुंड साहिब दर्शन करने को पहुंचे थे।विदित हो कि श्री हेमकुंड साहित के कपाट खुले से पहले इसकी भव्य तैयारी की जा रही है : हेमकुंड गुरुद्वारा प्रबंधक ट्रस्ट के अध्यक्ष सरदार नरेंद्र जीत बिन्द्रा ने बताया हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के कपाट खुलने पर सभी मान्यताओं और पवित्र परम्पराओं का निर्वहन होगा। सचखंड से पवित्र गुरुग्रंथ साहब गुरुद्वारा में विराजमान किया जाएगा। कहना था कि उत्तराखंड न सिर्फ आध्यात्म बल्कि धर्म, संस्कृति और समन्वय की भी प्रेरक भूमि है।
सिखों के पवित्र हिमालयी धाम हेमकुंड साहिब ऐसा प्रेरक गुरु धाम है। जहां के पहले ग्रंथी स्थानीय भ्यूंडार पुलना गांव के हिन्दू परिवार के नन्दा सिंह थे। गोविन्द घाट हेमकुंड गुरुद्वारा के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह बताते हैं बाबा नन्दा सिंह को सुखमनी साहिब का ऐसा आशीर्वाद मिला कि वह उन्हें सिद्ध हो गया।

उनके मुख से सुखमनी साहिब का पाठ कराने के लिए लोग उन्हें आदर पूर्वक पंजाब सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपने घरों में आमंत्रित करते थे।हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा यात्रा के गांव भ्यूंडार पुलना निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता और हेमकुंड साहिब के पहली ग्रंथी नन्दा सिंह के भतीजे भवान सिंह चौहान बताते हैं कि गुरुकृपा से हेमकुंड साहिब के पहले ग्रंथी बनने का सौभाग्य उनके पूर्वज को मिला।

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