Connect with us

उत्तराखण्ड

हृदय सम्राट बाबा हरदेव सिंह को अर्पित समर्पण दिवस

 

हल्द्वानी, 11 मई 2026: जब किसी महान आत्मा का जीवन मानवता के कल्याण हेतु पूर्णतः समर्पित हो जाता है, तब उसकी स्मृतियाँ केवल इतिहास का अध्याय नहीं रहतीं, बल्कि युगों-युगों तक जनमानस के लिए प्रेरणा का दिव्य स्रोत बन जाती हैं। ऐसे ही मानवता, प्रेम, विनम्रता और आध्यात्मिक जागृति के अद्वितीय प्रतीक युगदृष्टा बाबा हरदेव सिंह जी की पावन स्मृति को समर्पित ‘समर्पण दिवस’ का भावपूर्ण आयोजन बुधवार, 13 मई को सायं 5:00 से सायं 7:00 बजे तक संत निरंकारी सतसंग भवन, गौजाजाली, बरेली रोड, हल्द्वानी में किया जाएगा। इस अवसर पर समस्त निरंकारी परिवार एवं श्रद्धालु बाबा जी के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे।

बाबा हरदेव सिंह जी: प्रेम और सेवा के प्रतीक

बाबा हरदेव सिंह जी संत निरंकारी मिशन के आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा, सहजता और मानवीय संवेदनाओं के सजीव आत्मिक मित्र थे। उनकी मधुर मुस्कान, विनम्र व्यक्तित्व और दिव्य वाणी ने अनगिनत हृदयों को आत्मिक शांति प्रदान की। उन्होंने आत्मज्ञान के माध्यम से संदेश दिया कि सच्चा जीवन प्रेम, सेवा, सहअस्तित्व और समर्पण से परिपूर्ण होता है।

उनके नेतृत्व में मिशन ने रक्तदान, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण तथा युवा ऊर्जा को आध्यात्मिक दिशा देने जैसे लोक कल्याण कार्यों द्वारा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया। उनका स्पष्ट दृष्टिकोण था कि ईश्वर भक्ति मानव सेवा से ही सार्थक होती है।

वैश्विक विरासत और उपलब्धियाँ

लगभग 36 वर्षों तक मिशन का नेतृत्व करते हुए बाबा जी ने इसे 67 से अधिक देशों में फैलाया। मिशन को संयुक्त राष्ट्र संघ की सामाजिक एवं आर्थिक परिषद में सलाहकार का सम्मान प्राप्त हुआ। उनके संदेश जैसे “एकत्व में सद्भाव”, “वसुधैव कुटुम्बकम” तथा “एक को जानो, एक को मानो, एक हो जाओ” ने मानवता को प्रेम और एकता के सूत्र में बाँधा। उनका “दीवार रहित संसार” का स्वप्न आज भी विश्व बंधुत्व की प्रेरणा है।

निरंकारी परंपरा का निरंतरता

वर्तमान सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज इस दिव्य परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। उनके सान्निध्य में मिशन आत्मबोध, नैतिकता और विश्व बंधुत्व के पथ पर अग्रसर है।

‘समर्पण दिवस’ श्रद्धांजलि का अवसर होने के साथ-साथ प्रेम, सेवा, विनम्रता और समर्पण के जीवन-दर्शन को आत्मसात करने का पावन पर्व है। यह दिवस स्मरण कराता है कि महान आत्माएँ अपने कर्मों से सदैव जीवित रहती हैं।

ADVERTISEMENTS Ad

More in उत्तराखण्ड

Trending News

Follow Facebook Page