उत्तराखण्ड
नशा माफिया पर कार्रवाई की मांग, कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन का पुतला फूंका

हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश की मौजूदगी में हुए प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राजपुरा क्षेत्र में नशे के खिलाफ स्थानीय लोगों द्वारा लंबे समय से अभियान चलाया जा रहा है। उनका आरोप है कि नशे के कारोबारियों पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय शिकायत और विरोध करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों को ही मुकदमों में उलझाया जा रहा है।
विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि राजपुरा के लोगों द्वारा नशे के खिलाफ शुरू किया गया अभियान केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे हल्द्वानी की जनभावना है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस को ज्ञापन देने, हस्ताक्षर अभियान चलाने और चौकी पर धरना देने जैसे लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी बात रखी है। ऐसे में नशे के कारोबारियों पर कार्रवाई के बजाय नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर मुकदमे दर्ज होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि पुलिस जनता की सेवा के लिए है और पुलिस अधिकारियों को नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। कांग्रेस की मांग है कि नशे के वास्तविक कारोबारियों और उनके नेटवर्क की जांच कर कार्रवाई की जाए तथा निर्दोष सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
महानगर कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट गोविंद सिंह बिष्ट ने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों को अपराधी की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता अपने बच्चों और युवाओं को नशे से बचाने के लिए पुलिस-प्रशासन के समक्ष शिकायतें रख रही है, इसलिए ऐसे लोगों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने नशे के विरुद्ध आवाज उठाने वालों पर दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष समीक्षा कर गलत पाए जाने पर उन्हें समाप्त करने की मांग की।
जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल ने कहा कि राजपुरा में चल रहा नशा विरोधी अभियान किसी राजनीतिक स्वार्थ का नहीं, बल्कि स्थानीय जनता द्वारा अपने बच्चों और युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए चलाया जा रहा अभियान है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नशे के नेटवर्क की जांच होनी चाहिए। जनता की आवाज को मुकदमों या दबाव के माध्यम से दबाया नहीं जा सकता।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राजपुरा चौकी पर धरने के बाद जनप्रतिनिधि जब पुलिस कप्तान से मिलने पहुंचे तो उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया और उनका ज्ञापन भी स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री पोर्टल एवं संबंधित पुलिस प्राधिकरण के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करानी पड़ी।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जनप्रतिनिधियों ने अपने आवेदन में पहले ही आशंका जताई थी कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा सकते हैं। इसके बाद अभियान से जुड़े लोगों पर एफआईआर दर्ज होने से पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और उपलब्ध मोबाइल वीडियो को भी जांच का हिस्सा बनाया जाए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। साथ ही नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले समाजसेवियों एवं जनप्रतिनिधियों पर दर्ज मुकदमों की समीक्षा कर यदि वे गलत या द्वेषपूर्ण पाए जाएं तो उन्हें समाप्त किया जाए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राजपुरा की जनता के साथ खड़ी है और नशे के कारोबार के खिलाफ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आवाज उठाती रहेगी। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जनभावनाओं की अनदेखी जारी रही और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को परेशान किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
प्रदर्शन में हेमन्त बगड़वाल, जीवन कार्की, मधु सांगूड़ी, कमला सनवाल, रेनू तोमर, पुष्पा नेगी, दीप पाठक, राजेन्द्र बिष्ट रज्जी, मोहन बिष्ट, जाकिर हुसैन, गोविंद बगड़वाल, हेम दुर्गापाल, मयंक भट्ट, हिमांशु जोशी, कानू बिष्ट, दिनेश सांगूड़ी, प्रदीप नेगी, त्रिलोक बनोली, विजेंद्र चौहान, संजय शेखर, जीत सिंह, संदीप भैसोड़ा, मो. शरीफ, इशरत अली, दिवेश तिवारी, रवि गुरुरानी, कमलेश पांडे, शंकर कोहली, युवक कांग्रेस जिलाध्यक्ष इंजीनियर सुमित कुमार, अमित रावत, विक्की कोटलिया, छात्र नेता मेहुल साह सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

















