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उत्तराखण्ड

तेज़ी से घट रहा है गन्ने का रकबा चीनी उत्पादन पर मंडराने लगे संकट के बादल


रिपोर्टर – असलम कोहरा, पंतनगर

उत्तराखण्ड में पक्की खेती के नाम से मशहूर गन्ना फसल से किसान अब दूरी बनाते नज़र आ रहे हैं। विशेष रूप से उधम सिंह नगर ज़िले में गन्ने का रकबा लगातार घट रहा है, जिसका सीधा असर आने वाले वर्षों में चीनी उत्पादन पर पड़ सकता है।किसानों के अनुसार खेत की जुताई से लेकर गन्ना चीनी मिल तक पहुंचाने तक की बढ़ती लागत गन्ना छोड़ने की सबसे बड़ी वजह बन गई है। एक एकड़ में लगभग 300 क्विंटल गन्ना उत्पादन पर अब करीब 83 हजार रुपए तक का खर्च आ रहा है। इतनी लागत के बाद भी किसानों के हाथ में लगभग 37 हजार रुपए प्रति एकड़ ही शुद्ध बचत रह जाती है, जबकि किसान साल भर इस फसल की देखभाल में जुटा रहता है। कुछ साल पहले तक इतनी ही बुवाई पर लगभग 25 प्रतिशत कम लागत आती थी।गन्ने की बुवाई लागत में तेज़ी से बढ़ोतरी, जंगली व आवारा जानवरों से फसल की सुरक्षा पर अतिरिक्त खर्च और चीनी मिलों की ओर से बकाया भुगतान में देरी ने किसानों का गन्ना खेती से मोहभंग कर दिया है। हालात यह हैं कि तराई क्षेत्रों की तहसीलों में जहां 20–25 वर्ष पूर्व बड़े रकबे में भारी मात्रा में गन्ने की खेती होती थी, वहीं अब बहुत कम क्षेत्र में ही गन्ने की बुवाई की जा रही है।ऐसे में किसान अब विकल्प के रूप में पॉपुलर पेड़ की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। किसान बताते हैं कि पॉपुलर लगभग 5 साल में तैयार हो जाता है और इसके साथ खेत में गेहूं जैसी फसलें भी ली जा सकती हैं। इससे प्रति वर्ष लगभग 1 लाख से 1.25 लाख रुपए तक की शुद्ध आमदनी हो जाती है, जो गन्ने की अपेक्षा अधिक लाभकारी साबित हो रही है।शांतिपुरी के प्रगतिशील किसान एवं समाजसेवी डॉ. गणेश उपाध्याय का कहना है कि उर्वरकों, कीटनाशकों, डीज़ल और मज़दूरी के दाम जिस रफ्तार से बढ़ रहे हैं, उसी अनुपात में सरकार गन्ने का समर्थन मूल्य नहीं बढ़ा रही है। केंद्र सरकार ने गन्ने का मूल्य 355 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया है, जबकि लागत वृद्धि को देखते हुए यह मूल्य कम से कम 500 रुपए प्रति क्विंटल होना चाहिए।डॉ. उपाध्याय का आरोप है कि गन्ना मूल्य के बकाया भुगतान पर ब्याज देने के मामले में भाजपा सरकार मौन हो जाती है। उनका कहना है कि जब तक गन्ना मूल्य और भुगतान व्यवस्था में ठोस सुधार नहीं किए जाते, तब तक किसान गन्ना छोड़कर वैकल्पिक फसलों और पेड़ पौधों की ओर जाते रहेंगे, जिससे प्रदेश में गन्ना रकबे और चीनी उत्पादन में और गिरावट आ सकती है।

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