उत्तराखण्ड
रुद्रपुर: ४ श्रम संहिताओं वापसी की मांग पर आशा वर्कर्स की जोरदार हड़ताल, गल्ला मंडी से गांधी पार्क तक जुलूस,,
रुद्रपुर, १३ फरवरी २०२६।ट्रेड यूनियन ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने आजादी के बाद मजदूर अधिकारों पर सबसे बड़े हमले के विरोध में १२ फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल में पूरी ताकत झोंक दी।
गल्ला मंडी से गांधी पार्क तक शानदार जुलूस
रुद्रपुर गल्ला मंडी में एकत्र होकर आशाओं ने संक्षिप्त सभा की और गांधी पार्क तक जुलूस निकालकर सामूहिक प्रदर्शन किया। उन्होंने आशाओं को सरकारी कर्मचारी घोषित करने, न्यूनतम वेतन ३५,००० रुपये, नियमित वेतन, पक्की नौकरी व पेंशन की मांग बुलंद की।
सरकार पर शोषण का आरोप
ऐक्टू जिला सचिव अनीता अन्ना ने कहा कि मोदी सरकार आशा वर्कर्स पर नए-नए कामों का बोझ लाद रही है, बिना श्रमिक दर्जा दिए बंधुआ मजदूर की तरह काम लिया जाता है। शिशु मृत्यु दर कम करने में उनका योगदान है, फिर भी सिर्फ प्रोत्साहन राशि मिलती है। प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप ने चार श्रम कोड वापसी, ट्रेनिंग पर प्रतिदिन ५०० रुपये, बकाया भुगतान व मासिक वेतन जमा करने की मांगें दोहराईं।
ममता पानू: सम्मान से कम कुछ नहीं
जिला अध्यक्ष ममता पानू ने केंद्र-राज्य सरकारों पर आर्थिक शोषण का आरोप लगाया। भाजपा राज में एनएचएम बजट कम होने से शोषण बढ़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री के खटीमा वायदे को लागू करने की मांग की—आशाओं को नियमित वेतन, पक्की नौकरी व सम्मान जरूरी।बड़ी संख्या में उपस्थित आशाएं
गदरपुर की काजल मिस्त्री, काशीपुर की सुधा शर्मा, जसपुर की बबीता कश्यप, सितारगंज की मंजू, किच्छा की इंद्रा रावत, बाजपुर की पूजा शर्मा, खटीमा की अनीता बिष्ट सहित सैकड़ों आशाएं शामिल। अन्य: तारा बिष्ट, शशि बाला, सुनीता तिवारी, शरमीन सिद्दीकी आदि।


























