उत्तराखण्ड
क्या NABH मानकों को पूरा करते हैं निजी अस्पताल,,

स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि आज भी कई अस्पताल इन मानकों को पूरी तरह लागू नहीं कर पाए हैं। कई स्थानों पर मरीजों की अत्यधिक भीड़, चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी, संक्रमण नियंत्रण में लापरवाही, साफ-सफाई की खराब व्यवस्था तथा उपचार संबंधी अव्यवस्थाओं की शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे हालात मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करते हैं।
नियमों के अनुसार यदि किसी अस्पताल में निरीक्षण के दौरान गंभीर खामियां पाई जाती हैं, तो संबंधित प्राधिकरण द्वारा पहले कारण बताओ नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं। निर्धारित समय में सुधार नहीं होने पर दोबारा निरीक्षण किया जाता है। लगातार कमियां पाए जाने पर NABH मान्यता को निलंबित या निरस्त किया जा सकता है। वहीं, यदि अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के लाइसेंस नियमों या अन्य वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो संबंधित विभाग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई, लाइसेंस पर कार्रवाई अथवा अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में नियमित गुणवत्ता ऑडिट, पारदर्शी निरीक्षण और निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए तो मरीजों को सुरक्षित एवं बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होना चाहिए और सभी अस्पतालों को निर्धारित मानकों का पालन करना चाहिए।



