उत्तराखण्ड
आश्वासन’ सबसे उत्तम आसन, ‘सहयोग’ सबसे अच्छा योग-डॉ सर्वेश्वर,,
स्वार्थों का विषपान सिखाता है महादेव का नीलकण्ठ स्वरूप- प्राणी मात्र से प्रेम कर ही पाएँगे भगवान नीलकण्ठ की कृपा से,
हल्द्वानी। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा एम.बी. इंटर कॉलेज ग्राउंड, कैनाल रोड पर 29 जनवरी से 4 फरवरी 2026 तक सात दिवसीय भगवान शिव कथा का भव्य आयोजन हो रहा है। कथा का समय दोपहर 1 से 4 बजे तक है।कथा के दूसरे दिन दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य डॉ. सर्वेश्वर जी ने समुद्र मंथन प्रसंग सुनाते हुए बताया कि मंथन से निकले हलाहल कालकूट विष को जगत कल्याण हेतु भगवान शिव ने कंठ में धारण किया, जिससे वे नीलकण्ठ कहलाए।स्वामी जी ने कथा का मर्म समझाते हुए कहा कि नीलकण्ठ स्वरूप त्याग व सहनशीलता की प्रेरणा देता है। शिव भक्त का कर्तव्य है विषपान सीखना यानी स्वार्थों से ऊपर उठकर जगत कल्याण में योगदान देना। ‘मैं’ से ‘हम’ तक का सफर तय करें। अफसोस, आज मनुष्य स्वार्थ के लिए दूसरों की पीठ में छुरा घोंपते हैं। पशु-पक्षियों को भी क्षणिक स्वाद के लिए हजारों प्रतिदिन काटे जाते हैं। दुनिया भर में लाखों बूचड़खाने आधुनिक मशीनों से बेरहमी से जीवों का संहार कर रहे हैं।हम महादेव भक्त हैं, किंतु भूल जाते हैं कि वे पशुपतिनाथ भी हैं। पशु हत्या से पशुपतिनाथ को कैसे प्रसन्न करेंगे? सच्चा भक्त परपीड़ा त्याग देता है। उसके लिए श्रेष्ठ आसन ‘आश्वासन’ है दीनों को; उत्तम योग ‘सहयोग’ है प्राणियों के लिए; लंबी श्वास ‘विश्वास’ है रोती आँखों को। दया, प्रेम, त्याग व करुणा विकसित करने की जरूरत है, जो ब्रह्मज्ञान से नीलकण्ठ का घट दर्शन ही संभव बनाएगा।इस अवसर पर पंडाल में महाशिवरात्रि महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। भक्तों ने नृत्य कर आनंद लिया।उपस्थित रहे: जसनीत सिंह, कविता कौर, अंकित शर्मा, गीता बलुटिया, विपिन गुप्ता, दीक्षा गुप्ता, शिव कुमार, राजेंद्र धामी, देवकरण जी (पूर्व चेयरमैन रामपुर), रेणु अधिकारी ( दर्जा मंत्री), ओम प्रभाकर, संगीता, महेंद्र।































