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उत्तराखण्ड

सवर्ण समाज ने UGC ‘काले कानून’ के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया,,

हल्द्वानी। संवर्ण समाज के लोगों ने UGC के विवादास्पद कानून के खिलाफ एकजुट होकर विरोध की रणनीति बनाई। कार्यक्रम संयोजक प्रकाश हर्बोला ने कहा कि समाज लंबे समय से सोया रहा—SC/ST एक्ट, प्रमोशन में आरक्षण जैसे कानून बने, लेकिन विरोध नहीं हुआ। अब UGC कानून आ गया है, अगर संगठित होकर विरोध न किया तो आने वाली पीढ़ी को गुलामी या मजदूरी ही मिलेगी। उन्होंने चरणबद्ध आंदोलन चलाने और कोर्ट की अंतरिम रोक को स्थायी बनाने की अपील की।पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डिप्लोमा इंजीनियर्स जेएस बिष्ट ने प्रकाश हर्बोला की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि संगठित होना जरूरी है। यह मुहिम मंजिल तक पहुंचेगी, कितनी भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े। मनोहर मिश्रा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कर्मचारी संगठन ने नौकरियों में आरक्षण के नुकसान का जिक्र किया—जॉइनिंग करने वाला ही 3 साल बाद बॉस बन जाता, लेकिन अब ‘अति की भी इति’ हो गई। आंदोलन को सफल बनाना होगा।भुवन भट्ट ने UGC कानून में सुधार की मांग की—सभी विद्यार्थियों को समान शिकायत का अधिकार, लेकिन झूठी शिकायत पर दोगुना दंड। भुवन जोशी ने कहा कि वे सबसे पहले सवर्ण हैं; जाति-आधारित कानून से देश नहीं बचेगा, सबके लिए समान कानून जरूरी। राजपूत परिषद की शांति जीना ने अपील की—ठाकुर, पंडित, बनिया, कायस्थ, भूमिहार के रूप में न सोचें, एकजुट होकर दबाव का मुकाबला करें।बैठक में पलक अग्रवाल (अध्यक्ष, महिला अग्रवाल सभा), प्रदीप सबरवाल (ट्रांसपोर्ट यूनियन अध्यक्ष), इंदर भुटियानी (संरक्षक), हर्षवर्धन पांडे, देवीदयाल उपाध्याय, राजेंद्र सिंह, राहुल झीगरन, त्रिलोक बिष्ट, मनोज अग्रवाल, नीतू अग्रवाल, नितिन बोरा आदि ने भी विचार व्यक्त किए।आगे के कार्यक्रम के लिए 9 सदस्यीय कमेटी गठित की गई। अगली बैठक 4 फरवरी 2026 को होगी।

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