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उत्तराखण्ड

शोध की सार्थकता तभी जब तकनीकें किसानों तक पहुंचें – डॉ. चौहान,,


कृषि तकनीकी हस्तांतरण पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

असलम कोहरा पंतनगर

पंतनगर। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि कृषि शोध की सार्थकता तभी है, जब विकसित तकनीकें व्यवहारिक रूप में किसानों के खेतों तक पहुंचें। समेटी–उत्तराखण्ड एवं प्रसार शिक्षा संस्थान, नीलोखेड़ी (हरियाणा) के संयुक्त तत्वावधान में प्रसार निदेशालय में ‘प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में प्रेरणा एवं संचार की भूमिका’ विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वे मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।डॉ. चौहान ने प्रशिक्षणार्थियों का आह्वान किया कि वे पंतनगर विश्वविद्यालय द्वारा विकसित तकनीकों को किसानों के द्वार तक पहुँचाने में अग्रणी भूमिका निभाएं, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके। उन्होंने कहा कि कृषि तकनीक तीव्र गति से बदल रही है, इसलिए विस्तार रणनीतियों में भी समयानुकूल बदलाव जरूरी है। इसके लिए पारंपरिक सोच से ऊपर उठकर किसानों के साथ काम करने के तरीके और दृष्टिकोण – दोनों में परिवर्तन लाना होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना के 25 वर्ष बाद भी कई क्षेत्रों में पुरानी तकनीकों का उपयोग हो रहा है, जिसे बदलना समय की मांग है।कुलपति ने कहा कि वैज्ञानिक समुदाय और कृषकों के बीच दूरी कम किए बिना तकनीक हस्तांतरण प्रभावी नहीं हो सकता। विस्तार कार्यों को आजीविका संवर्धन एवं उद्यमिता विकास से जोड़ते हुए किसानों को आत्मनिर्भर बनाना होगा।कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक, कृषि (कुमायूँ मंडल) डॉ. पी.के. सिंह ने अधिकारियों से अपील की कि वे विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं विभागीय कार्यक्रमों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुँचाने का भरपूर प्रयास करें। निदेशक, प्रसार शिक्षा, डॉ. जितेन्द्र क्वात्रा ने विस्तार कर्मियों से आग्रह किया कि वे केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करें।प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. बी.डी. सिंह एवं पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. एस.आर. वर्मा ने कहा कि कृषि तकनीकी हस्तांतरण को गति देने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आवश्यक हैं। पांच दिवसीय इस प्रशिक्षण में उत्तराखंड के सभी जनपदों से आए कुल 35 मध्य स्तरीय विस्तार कर्मी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में विभिन्न विषय विशेषज्ञ, संसाधन व्यक्ति एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे। अंत में प्रसार शिक्षा निदेशालय की ज्योति कनवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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