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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी बनभूलपुरा रेलवे भूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट का फैसला,,

सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे भूमि विवाद में व्यावहारिक समाधान का रास्ता दिखाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने राज्य सरकार को प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन परिवारों को रेलवे भूमि पर रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं, लेकिन पात्र लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत घर मुहैया कराना सरकार का कर्तव्य है। 31 मार्च तक मुद्दे का समाधान सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया, अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।कोर्ट के प्रमुख निर्देशऑन-साइट कैंप: 19 मार्च से बनभूलपुरा में विशेष शिविर लगाकर PMAY आवेदन प्रक्रिया सरल की जाएगी।प्रशासन की भूमिका: नैनीताल जिला प्रशासन और हल्द्वानी अधिकारी फॉर्म बांटेंगे, सहायता देंगे।काउंसलिंग: सामाजिक कार्यकर्ता और विशेषज्ञ परिवारों को योजना के लाभ समझाएंगे, भ्रम दूर करेंगे।पात्रता पर फोकस: ज्यादातर परिवार EWS श्रेणी के हैं, PMAY मुख्य विकल्प।जस्टिस बागची ने कहा, “भूमि राज्य की है, लेकिन यह मानवीय सहायता का मामला है।” सुनवाई के दौरान इलाके में भारी पुलिस बल, ड्रोन निगरानी और SSP डॉ. मंजूनाथ टीसी मौजूद रहे।राज्य सरकार की सक्रियतामुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर दर्जा राज्य मंत्री शंकर कोरंगा स्वयं सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। उन्होंने केंद्र-राज्य सरकार और रेलवे के वकीलों से विस्तृत चर्चा की। सुनवाई बाद कोरंगा ने कहा कि निर्देश सकारात्मक हैं, प्रशासन अब पुनर्वास की तैयारियां तेज कर रहा है।यह फैसला हल्द्वानी जैसे संवेदनशील इलाकों में भूमि विवादों के समाधान के लिए सकारात्मक कदम है, जहां रेलवे और स्थानीय प्रशासन के बीच लंबे समय से टकराव चल रहा था।,

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