उत्तराखण्ड
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने “मैं उत्तराखण्ड हूँ” कॉनक्लेव में प्रदेश की मातृशक्ति, युवा, शिक्षा एवं संस्कृति पर अपनाए विचार साझा किए
देहरादून। उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने रविवार को ओहो रेडियो द्वारा आयोजित “मैं उत्तराखण्ड हूँ” कॉनक्लेव में भाग लेकर प्रदेश की मातृशक्ति, युवाओं, शिक्षा, शोध एवं सांस्कृतिक धरोहर को लेकर अपने विचार साझा किए। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड की बेटियां और महिलाएं अपनी मेहनत, साहस और प्रतिभा से हमेशा प्रदेश को नई दिशा देती रही हैं और वे आने वाले समय में प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक लेकर जाएंगी।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड को प्रकृति ने योग, आयुर्वेद, शहद, अरोमा एवं वेलनेस जैसे अमूल्य उपहार दिए हैं। इन प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदाओं का सही उपयोग कर प्रदेश को वैश्विक पहचान और आर्थिक समृद्धि की नई राह पर ले जाना होगा।
राज्यपाल ने देहरादून और उत्तराखण्ड को शिक्षा और शोध के प्रमुख केंद्र के रूप में बताते हुए कहा कि यहां की बड़ी शैक्षणिक संस्थाएं प्रदेश की अमूल्य धरोहर हैं। रिसर्च एवं इनोवेशन को बढ़ावा देना जरूरी है ताकि प्रदेश और देश नवाचारों के माध्यम से प्रगति कर सकें।
युवाओं पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय नई तकनीकों जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और मेटावर्स का युग है, जिसमें युवा दक्षता हासिल करके प्रदेश की प्रगति में बड़ा योगदान दे सकते हैं।
योग और अध्यात्म के महत्व पर भी राज्यपाल ने विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योगभूमि के रूप में उत्तराखण्ड की पहचान विश्व में विशेष है। कोविड काल में योग और आयुर्वेद की उपयोगिता स्पष्ट हुई है। अध्यात्मिक धरोहर मानव जीवन को शांति, संतुलन एवं जागृति प्रदान करती है, जिसे और सशक्त बनाना होगा।
राज्यपाल ने उल्लेख किया कि इस वर्ष प्रदेश में राष्ट्रीय खेल, जी-20 सम्मेलन, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और आपदा प्रबंधन सम्मेलन जैसे बड़े आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं, जो प्रदेश के लिए गौरव की बात है।















