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उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में पत्रकारिता छात्रों के लिए चार दिवसीय ऑनलाइन शोध कार्यशाला संपन्न,,
हल्द्वानी, 9 जनवरी 2026: हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित चार दिवसीय ऑनलाइन शोध कार्यशाला 6 से 9 जनवरी 2026 तक सफलता पूर्वक संपन्न हो गई। विभाग के निदेशक प्रो. राकेश चन्द्र रयाल के निर्देशन में हुई इस कार्यशाला में एम.ए. पत्रकारिता एवं जनसंचार के चतुर्थ सत्रार्ध के छात्रों को लघु शोध प्रबंध के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्षों की गहन जानकारी दी गई। यह विशेष रूप से पुनः पंजीकृत छात्रों एवं पूर्व कार्यशालाओं से वंचित रह गए शिक्षार्थियों के लिए आयोजित की गई थी।प्रथम दिवस: संचार शोध की बुनियादप्रथम सत्र में प्रो. राकेश चन्द्र रयाल ने “संचार शोध का अर्थ, परिभाषा एवं विषय क्षेत्र” पर व्याख्यान दिया, जिसमें संचार तकनीक की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। डॉ. घनश्याम जोशी ने शोध की अवधारणा, उसके तत्वों एवं प्रकारों को सरल उदाहरणों से स्पष्ट किया। द्वितीय सत्र में प्रो. रयाल ने “संचार शोध में विषय चयन” पर मार्गदर्शन प्रदान किया।द्वितीय दिवस: लघु शोध का महत्वदूसरे दिन डॉ. राकेश चन्द्र रयाल ने “लघु शोध का महत्व, उद्देश्य एवं लाभ” पर चर्चा की। डॉ. सीता ने “सामाजिक अनुसंधान एवं शोध प्रविधि” में शोध डिजाइन की प्रक्रिया समझाई। दूसरे सत्र में प्रो. रयाल ने लघु शोध के शैक्षणिक महत्व को रेखांकित किया।तृतीय दिवस: शोध लेखन की तकनीकेंडॉ. कल्पना पथनी लखेड़ा ने “शोध संदर्भ एवं शोध ग्रंथ सूची” पर क्रमबद्ध व्याख्यान दिया। डॉ. दीपांकर जोशी ने “शोध में साहित्यिक चोरी” विषय पर छात्रों को नैतिकता के प्रति जागरूक किया।चतुर्थ दिवस: समापन एवं मार्गदर्शनअंतिम दिन डॉ. राकेश चन्द्र रयाल ने शुभारंभ किया। डॉ. दीपांकर जोशी ने “शोध प्रबंध लेखन में संदर्भों का महत्व” पर विचार रखे। डॉ. नीरजा सिंह ने “रिपोर्ट लेखन एवं लघु शोध निर्माण” पर व्याख्यान दिया। प्रो. रयाल ने “एक अच्छा लघु शोध प्रबंध कैसे तैयार करें” पर मार्गदर्शन देकर कार्यशाला का समापन किया।छात्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाई तथा इसे शोध क्षमता विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। उन्होंने विश्वविद्यालय एवं विभाग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।,,




























