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उत्तराखण्ड

पत्रकार की खबर से स्कूल संचालक ने पत्रकार के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज किया जिस पर पत्रकारों में भारी रोष मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

 

हल्द्वानी/रामनगर। हल्द्वानी क्षेत्र में जनहित से जुड़ी अतिक्रमण‑विरोधी खबर के प्रकाशन के बाद नाराज स्कूल संचालक ने इस खबर को लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार संजय पाठक के खिलाफ नोटिस भेजने और कोर्ट में क्रिमिनल केस दर्ज कराने की “हिमाकत” कर डाली, जिसके विरोध में रामनगर में पत्रकारों ने जोरदार हल्ला बोला।

रामपुर रोड स्थित न्यू आदर्श कॉलोनी के रास्ते पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के बाद भी यह मामला शांत नहीं हुआ है। यहां स्थित माउंट लीटेरा जी स्कूल संचालक गिरजेश पांडे पर सार्वजनिक रास्ते पर अवैध कब्जा, रास्ते को स्कूल का रास्ता बनाने और आसपास के लगभग डेढ़ दर्जन परिवारों के जीवन को दूभर बनाने के आरोप लगे हैं। इन आरोपों पर कुमाऊं आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत ने सख्त नोटिस लेते हुए अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी कराए थे, जिसके बाद 31 मार्च 2026 को प्रशासन ने अतिक्रमणकारी गेट तोड़कर रास्ता बहाल किया था।

इसी खबर को समय‑समय पर जनहित में उठाने वाले पत्रकार संजय पाठक (“प्रेस 15 न्यूज” के संपादक) के खिलाफ स्कूल संचालक ने अब कानूनी नोटिस भिजवाया और एसीजेएम कोर्ट में आपराधिक मामला दर्ज कराने की कोशिश की, जिसे पत्रकार समुदाय ने “दबाव में लेने और रिपोर्टिंग रोकने” की रणनीति बता रहा है।

बुधवार को रामनगर में वरिष्ठ पत्रकारों ने इस कार्रवाई के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और एसडीएम गोपाल सिंह चौहान के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन सौंपकर सख्त जांच और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि जनहित में खबर लिखने पर पत्रकार को निशाना बनाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है और भविष्य में पत्रकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए सरकार को ठोस नीतिगत कदम उठाने चाहिए।

पत्रकारों के साथ इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार मयंक मैनाली (संपादक, कुमाऊं क्रांति समाचार), राहुल सिंह दरमवाल, गौरव मैंदोलिया (द संडे पोस्ट), संजय मेहता (इंडिया लाइव 24×7) और अधिवक्ता राजेश शर्मा सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्कूल परिसर के आसपास कई सालों से डर और तनाव का माहौल बना हुआ है, जिसे अब पत्रकारों की खबर और बाद में प्रशासनिक कार्रवाई ने थोड़ा तोड़ा है, लेकिन पत्रकारों को दबाव में लेने की कोशिश से एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

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