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भक्ति भाव से सराबोर भक्ति पर्व समागम का दिव्य आयोजनभक्ति केवल शब्द नहीं, जीवन जीने की सजग यात्रा है,,निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज,,

हल्द्वानी, 11 जनवरी 2026: ‘‘भक्ति केवल शब्द नहीं, जीवन जीने की सजग यात्रा है।’’ यह प्रेरणादायक विचार निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने हरियाणा के संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा में आयोजित ‘भक्ति पर्व समागम’ के पावन अवसर पर व्यक्त किए।इस अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के सान्निध्य में श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास की अनुपम छटा छाई रही। दिल्ली-एनसीआर सहित देश-विदेश से पधारे हजारों श्रद्धालुओं ने सत्संग के माध्यम से आध्यात्मिक आनंद एवं आत्मिक शांति की अनुभूति प्राप्त की।इसी क्रम में भक्ति पर्व के उपलक्ष्य में हल्द्वानी के निरंकारी सत्संग भवन, गोजाजाली, बरेली रोड में एक समागम का आयोजन किया गया। मिशन के प्रचारक कर्नल श्री जसबिंदर सिंह जी ने सत्संग को संबोधित करते हुए कहा कि सतगुरु माता जी के अनुसार भक्ति कोई नाम या दिखावा नहीं, बल्कि आत्म-मंथन द्वारा स्वयं को जाँचने वाली सजग यात्रा है। सच्ची भक्ति में अपनी कमियों को सुधारना, हर पल जागरूक रहना और हर एक में निराकार परमात्मा को देखकर सरल, निष्कपट व्यवहार करना शामिल है। अज्ञान की गलती सुधर सकती है, किंतु जानबूझकर चोट पहुँचाना या बहाने बनाना भक्ति नहीं। भक्त का स्वभाव मरहम का होता है। ब्रह्मज्ञान के बाद सेवा, सुमिरन एवं सत्संग से इस एहसास को बनाए रखना ही भक्ति है—यह जीवन का चुनाव है।कर्नल जसबिंदर सिंह जी ने माता सविंदर जी एवं राजमाता जी के जीवन को भक्ति, समर्पण और निःस्वार्थ सेवा का सजीव प्रतीक बताते हुए कहा कि ये मातृशक्तियाँ निरंकारी मिशन के लिए श्रेष्ठ उदाहरण हैं। इस अवसर पर परम संत संतोख सिंह जी सहित अन्य संत महापुरुषों के तप, त्याग एवं ब्रह्मज्ञान प्रचार के अमूल्य योगदान का भावपूर्ण स्मरण भी किया गया। श्रद्धालुओं ने उनके जीवन से प्रेरणा ग्रहण कर भक्ति, सेवा एवं समर्पण का संकल्प लिया।समागम में विभिन्न वक्ताओं, कवियों एवं गीतकारों ने गुरु महिमा, भक्ति भाव एवं मानव कल्याण के संदेशों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। निरंकारी मिशन का मूल सिद्धांत यही है कि भक्ति परमात्मा के तत्व को जानकर ही सार्थक होती है। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को ब्रह्मज्ञानी भक्ति को दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।

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