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उत्तराखण्ड

भाकपा माले एवं किसान महासभा ने उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर लगाने का किया विरोध प्रदर्शन,

हल्द्वानी। बिजली की स्मार्ट मीटर योजना के खिलाफ माले का प्रदर्शन , मीटर योजना वापस लेने, यूपीसीएल के निजीकरण की कोशिश बंद करने, बिजली दरों में किसी भी तरह की वृद्धि न करने और विद्युत बिलों में मीटर रीडिंग के अतिरिक्त लगाये जाने वाले फिक्स चार्ज को समाप्त करने की मांग उठाई

उत्तराखण्ड की धामी सरकार से बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने की योजना वापस लेने और यूपीसीएल के निजीकरण की कोशिशें बंद करने की मांग पर भाकपा माले के राज्यव्यापी प्रदर्शन के तहत आज बुधपार्क हल्द्वानी में भाकपा माले और किसान महासभा कार्यकर्ताओं ने धरना प्रदर्शन किया। धरने के बाद बुध पार्क से जुलूस उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा जहां प्रदर्शन के बाद एसडीएम ऑफिस से पांच सूत्रीय मांग पत्र मुख्यमंत्री को भेजा गया।

भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डा कैलाश पाण्डेय ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि, धामी सरकार बिजली के स्मार्ट मीटर लगा रही है जिसे पहले प्रीपेड मीटर के नाम से लगाने की योजना थी। भारी जनविरोध के बाद प्रीपेड मीटर योजना का नाम बदलकर स्मार्ट मीटर योजना कर दिया गया। पहले ही डिजिटल मीटर पूरे प्रदेश में लगे हुए हैं तब ये स्मार्ट नामधारी नए मीटर लगाए जाने की आवश्यकता समझ से परे है। बिजली चोरी रोकने का तर्क देकर जो स्मार्ट मीटर लगाए जाने की योजना बनाई गई है वह केवल भरमाने की कोशिश है क्योंकि जो भी लोग पहले से ही मीटर लगाए हुए हैं वे बदस्तूर बिजली बिल जमा करते हैं। ऐसे में इसके पीछे यूपीसीएल के निजीकरण और भविष्य में इन मीटरों को प्रीपेड बनाने की कोशिशें ही प्रतीत होती हैं जिसका हम पुरजोर विरोध करते हैं।

उन्होंने कहा कि, जिस तरह से स्मार्ट मीटर लगाने का काम प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रिय पूंजीपति गौतम अडानी को दिया गया है उससे सरकार की मंशा और भी साफ़ हो गई है। इसके जरिए कुल मिलाकर सरकार यूपीसीएल (उत्तराखण्ड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड) का निजीकरण और बिजली के दामों में भारी बढ़ोत्तरी करना चाहती है और इस उपक्रम को अडानी के हवाले करना चाहती है, यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं हो सकता है। स्मार्ट मीटर लगाने की यह नीति जनता के खिलाफ़ तो है ही साथ ही यह विद्युत विभाग के कर्मचारियों के लिए भी खतरे की घंटी है क्योंकि स्मार्ट मीटर लगाने से भारी पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी होगी, पहले से ही ठेके पर काम कर रहे कर्मियों की नौकरियों पर गाज गिरना लाजमी है। जिससे पहले से भयानक हो रही बेरोज़गारी में और इजाफा होगा। इसलिए हम सरकार की इस नीति का विरोध करना और स्मार्ट मीटर योजना को रद्द किए जाने की मांग करना बेहद जरूरी मानते हैं।

किसान महासभा बागजाला की अध्यक्ष उर्मिला रैस्वाल ने कहा कि, भाजपा सरकार द्वारा पहले ही कई कई बार बिजली दरों में वृद्धि करके आम जनता के लिए मुश्किलें खड़ी की गई हैं और अब सरकार स्मार्ट बिजली मीटर लगाने की योजना पर काम कर उनकी मुश्किलों को बढ़ाने का काम कर रही है। राज्य सरकार की यह नीति कुल मिलाकर विद्युत विभाग के निजीकरण और जनता पर भारी बिजली बिलों के बोझ को डालने का काम करेगी।

भाकपा माले की ओर से आज 02/04/2025 को राज्यव्यापी धरना प्रदर्शन के माध्यम से उठाई गई पांच सूत्रीय मांगें: राज्य में विद्युत के स्मार्ट मीटर लगाने की योजना वापस ली जाए और बिजली मीटरों की पुरानी पद्धति जारी रखी जाए। यूपीसीएल के निजीकरण- ठेकाकरण की कोई भी कोशिश बंद की जाय। लगातार जारी लो-वोल्टेज की समस्या और उसके बावजूद बिजली बिलों में भारी बढ़ोत्तरी पर रोक लगाई जाए।

बिजली दरों में किसी भी तरह की वृद्धि न की जाए।

विद्युत बिलों में मीटर रीडिंग के अतिरिक्त लगाये जाने वाले फिक्स चार्ज को समाप्त किया जाय ।

    धरना प्रदर्शन में डा कैलाश पाण्डेय, प्रकाश फुलोरिया, उर्मिला रैस्वाल, वेद प्रकाश, पंकज चौहान, मो यासीन, मीना भट्ट, मोहन लाल आर्य, नफीस अहमद खान, मीना भट्ट, नारायण दत्त जोशी, विमला देवी, हरक सिंह बिष्ट, चन्दन सिंह मटियाली, नंदी देवी, चंपा देवी, तुलसी देवी, इमरान, कमल नौला, शाहनवाज, लक्ष्मी आदि मुख्य रूप से शामिल रहे। डा कैलाश पाण्डेय जिला सचिव भाकपा माले नैनीताल,

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