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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी पत्रकारों का SSP कार्यालय में धरना जैसा प्रदर्शन, फर्जी पत्रकारों और सोशल ट्रोलर्स पर शिकंजा कसेगी पुलिस!

पवनीत सिंह बिंद्रा 

हल्द्वानी, 22 अप्रैल 2026 (संवाददाता): हल्द्वानी के पत्रकार समुदाय में उबाल! श्रमजीवी पत्रकार यूनियन उत्तराखंड के नेतृत्व में आज दर्जनों पत्रकारों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टीसी के कार्यालय में पहुंचकर जोरदार विरोध दर्ज किया। मुख्य मांग- सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूब चैनलों के दुरुपयोग और स्वयंभू ‘पत्रकारों’ की अभद्रता पर केंद्रीय जांच एजेंसी स्तर की कार्रवाई। SSP ने तुरंत आश्वासन दिया कि अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।

फर्जी पत्रकार कमल कफलटिया का काला कारनामा: बुद्ध पार्क में प्रिंट पत्रकार पर हमला

ज्ञापन का केंद्र बिंदु बना कमल कफलटिया, जो खुद को पत्रकार बताकर बदनामी मचा रहा है। यूनियन जिलाध्यक्ष सर्वेन्द्र बिष्ट ने बताया, “कुछ दिन पहले बुद्ध पार्क में इस व्यक्ति ने एक प्रतिष्ठित प्रिंट मीडिया पत्रकार पर खुलेआम हमला बोला। गाली-गलौज, धमकियां और अभद्र व्यवहार से न केवल पत्रकार भयभीत हुए, बल्कि स्थानीय स्तर पर पत्रकारिता की इज्जत दांव पर लग गई।” जिला महामंत्री भूपेंद्र रावत ने कहा, “ऐसे तत्वों को पत्रकार का लबादा ओढ़कर अपराध करने की छूट नहीं मिलेगी।”

पुलिस ने मामले की जांच शुरू करने का भरोसा दिलाया। सवाल उठ रहा है- क्या कफलटिया के पीछे कोई राजनीतिक संरक्षण है?

सोशल मीडिया का ‘जहर’: इन्फ्लुएंसर्स पत्रकारों को निशाना बना रहे, यूनियन ने चेतावनी दी

सोशल मीडिया अब पत्रकारों के लिए जंग का मैदान बन गया है। ज्ञापन में खुलासा हुआ कि कई यूट्यूब चैनल और इंस्टाग्राम/फेसबुक अकाउंट्स सनसनी फैलाने के चक्कर में पत्रकारों पर झूठे आरोप लगाते हैं। उद्देश्य? व्यूज, लाइक्स और पैसे! इससे मीडिया की साख गिर रही है और लोकतंत्र का चौथा खंभा कमजोर हो रहा।

यूनियन ने मांग की:

सभी संदिग्ध अकाउंट्स की फॉरेंसिक जांच।

आईटी एक्ट धारा 66A, 67A और IPC 153A के तहत FIR दर्ज।

प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट हटाने का आदेश।

पत्रकार सुरक्षा के लिए विशेष हेल्पलाइन लॉन्च।

SSP का धमाकेदार बयान: “जीरो टॉलरेंस, कानून बिगाड़ने वाले जेल की राह पर!”

SSP डॉ. मंजूनाथ टीसी ने पत्रकारों से कहा, “आपका सम्मान हमारा सम्मान। अभद्रता करने वाले, फर्जी खबरें फैलाने वाले किसी को नहीं छोड़ेंगे।” उन्होंने वादा किया:

48 घंटे में रिपोर्ट का विश्लेषण।

साइबर सेल की टीम तैनात।

भविष्य के लिए SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी।

नैनीताल जिले में पत्रकारों के लिए ‘सुरक्षा कार्ड’ योजना।

SSP बोले, “सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों पर लोहे का हाथ!”

क्यों है यह घटना मील का पत्थर? उत्तराखंड में पत्रकारों पर बढ़ते खतरे

उत्तराखंड में पिछले दो वर्षों में 15 से अधिक पत्रकारों पर हमले दर्ज हुए। हल्द्वानी-नैनीताल क्षेत्र में सड़क सुरक्षा, भ्रष्टाचार और पर्यावरण मुद्दों पर रिपोर्टिंग से ट्रोलिंग बढ़ी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन पूरे राज्य में लहर ला सकता है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी ऐसे मामलों में सख्ती की मांग की है।

पत्रकार बंधु लौटे तो नारे लगाए- “पत्रकार सुरक्षित, लोकतंत्र मजबूत!”

मीडिया सेल, जनपद नैनीताल | संपर्क: 05942-xxx-xxx

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