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उत्तराखण्ड

बार का अल्टीमेटम: जज की अभद्रता पर सोमवार से बहिष्कार!

अधिवक्ता सम्मान पर हमला, चेतावनी न मानने पर उच्च न्यायालय में शिकायत

नैनीताल, 18 अप्रैल 2026। नैनीताल जिला न्यायालय में अधिवक्ता बिरादरी और प्रथम अपर जिला जज (विशेष न्यायाधीश/एनडीपीएस) के बीच का विवाद अब आर-पार की लड़ाई का रूप ले चुका है। बार एसोसिएशन ने जज पर लगातार अभद्र व अपमानजनक व्यवहार के गंभीर आरोप लगाते हुए सोमवार (21 अप्रैल) से उनकी अदालत का पूर्ण बहिष्कार घोषित कर दिया। संगठन ने उच्च न्यायालय नैनीताल के प्रशासनिक अधिकारियों को विस्तृत शिकायत भी सौंपने का फैसला लिया है।

लंबे समय से चली आ रही समस्याएं

अधिवक्ताओं के अनुसार, न्यायालय में कई माह से असहज माहौल बना हुआ है। मुख्य आरोप ये हैं:

गवाहों पर दबाव बनाकर जबरन बयान दर्ज कराना।

मनमाने तरीके से बयान लिखना और अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति में तथ्यों में हेरफेर।

शिकायत करने वाले अधिवक्ताओं को नजरअंदाज कर धमकाना व अपमानित कर बाहर भेजना।

बार ने कई दौर की बातचीत और आपसी सहमति से समाधान की कोशिश की, लेकिन कोई बदलाव नहीं आया। जिला जज को पूर्व में लिखित चेतावनी भी दी गई थी।

घटनाक्रम: आश्वासन से उलट व्यवहार

शुक्रवार को बार एसोसिएशन की आपातकालीन आम सभा में मुद्दे पर तीखा रोष व्यक्त हुआ। सभा के बाद अध्यक्ष अरुण बिष्ट, सचिव संजय सुयाल सहित पदाधिकारी जज से मिले। जज ने व्यवहार सुधार का मौखिक आश्वासन दिया। लेकिन शनिवार को वही पीड़ित अधिवक्ता (जिसकी शिकायत पहले दर्ज हुई) न्यायालय पहुंचा। शिकायत दोहराने पर जज ने कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां कीं, जिससे अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश की लहर दौड़ गई।

पीड़ित अधिवक्ता ने बताया, “शिकायत उठाने पर जज ने सार्वजनिक रूप से अपशब्दों का सहारा लिया, जो हमारे पेशेवर सम्मान पर सीधा प्रहार है।”

बार नेतृत्व का साफ रुख

बार अध्यक्ष अरुण बिष्ट ने संवाददाताओं से कहा, “अधिवक्ताओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा। अभद्रता हर हाल में बर्दाश्त से बाहर है। हम न्यायिक गरिमा की रक्षा के लिए कटिबद्ध हैं।”

सचिव संजय सुयाल ने स्पष्ट किया, “सोमवार से प्रथम अपर जिला जज की अदालत का पूर्ण बहिष्कार। उच्च न्यायालय को पूरी घटनाओं का ब्योरा भेजेंगे। व्यवहार में ठोस सुधार तक कार्रवाई जारी रहेगी।”

संभावित प्रभाव व भविष्य

यह बहिष्कार एनडीपीएस व अन्य विशेष मामलों की सुनवाई प्रभावित कर सकता है, जिससे आरोपी व गवाहों को परेशानी हो सकती है। जिला न्यायालय प्रशासन ने अभी कोई टिप्पणी नहीं की। उच्च न्यायालय की ओर से जांच की उम्मीद है। अधिवक्ता इसे न केवल स्थानीय मुद्दा, बल्कि पूरे प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा मान रहे हैं। पूर्व में उत्तराखंड के अन्य जिलों में भी ऐसे विवाद हुए हैं, जो बार-बेंच संबंधों पर सवाल उठाते हैं।

बार ने सदस्यों से एकजुट रहने का आह्वान किया है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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