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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी गुरुद्वारा गुरु नानक पूरा में चुनावी मीटिंग बनी हंगामे का अड्डा: सिख मर्यादा पर लगे सवाल,

हल्द्वानी, उत्तराखंड, 28 फरवरी 2026 (विशेष संवाददाता): शहर के प्रसिद्ध गुरुद्वारा गुरु नानक पूरा में आज सुबह 9 बजे मुख्य सेवादार हरजीत सिंह सच्चर द्वारा बुलाई गई आम सभा में चुनावी प्रक्रिया को लेकर भारी हंगामा हो गया। पूर्व कमेटी का कार्यकाल 11 मार्च को समाप्त हो रहा है, इसलिए सदस्यों के सुझाव लेने का कार्यक्रम था, लेकिन बात सिलेक्शन पर पहुंचते ही हालात बेकाबू हो गए।आम सभा का उद्देश्य: चुनाव या सिलेक्शन?मीटिंग की शुरुआत शांतिपूर्ण रही। हरजीत सिंह सच्चर ने स्पष्ट किया कि पूर्व कमेटी का कार्यकाल खत्म होने के बाद नई कमेटी गठित करने हेतु सभी के सुझाव महत्वपूर्ण हैं एवं वीडियो ग्राफी से मीटिंग शुरू की गई । लेकिन 28 फरवरी को ही सर्वसम्मति से चुनाव की बजाय सिलेक्शन प्रक्रिया अपनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। इसका मतलब था कि नामांकन के बाद सर्वसम्मति से चयन किया जाएगा, बिना मतदान के। यह निर्णय कई सदस्यों को नागवार गुजरा।नाम प्रस्ताव के साथ शुरू हुआ विवादसिलेक्शन प्रक्रिया शुरू होते ही पहले नाम रमन साहनी ने खुद को आगे बढ़ाया। इसके बाद जसपाल सिंह कोहली ने अपना नाम प्रस्तुत किया। तीसरा नाम जगमीत सिंह आनंद ने प्रस्तावित किया। ये तीनों नाम चर्चा में थे, लेकिन कुछ सदस्यों ने जोरदार विरोध जताया। विरोधियों का तर्क था कि सिलेक्शन से लोकतंत्र की भावना कमजोर होगी और पारदर्शिता पर सवाल उठेंगे। बहस तेज होते ही माहौल में तनाव बढ़ गया।हंगामा चरम पर: गले पड़ने की नौबतविरोध बढ़ने पर आपसी बेसबाजी शुरू हो गई। चीखने-चिल्लाने के बीच एक-दूसरे पर हाथ उठाने की स्थिति बन गई। एक वरिष्ठ सदस्य ने सिख मर्यादा का हवाला देते हुए चेतावनी दी, “हाजिर-नाजिर गुरु ग्रंथ साहिब जी विराजमान हैं, ऐसी अराजकता गुरु घर में शोभा नहीं देती।” लेकिन कुछ लोग उनसे ही भिड़ गए। इस दृश्य ने सभी को शर्मसार कर दिया। बलिदानी गुरुओं द्वारा स्थापित शांति और एकता के पथ पर यह कदम गहरी चोट पहुंचाने वाला रहा। कई सदस्यों ने कहा कि गुरु घर आने का उद्देश्य ही ऐसी शिक्षा है, जो आजकल भुला दी गई।नया निर्णय: चुनाव अधिकारी और मेंबरशिप से निष्पक्षतालंबे हंगामे के बाद मीटिंग को संभाला गया। सर्वसम्मति से चुनाव अधिकारी नियुक्त किए गए। अब पहले मेंबरशिप की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, उसके बाद निष्पक्ष चुनाव कराए जाएंगे। इससे नई कमेटी का गठन होगा। प्रबंधन ने अपील की है कि भविष्य में शांति बनाए रखी जाए और सिख सिद्धांतों का पालन हो।समुदाय की प्रतिक्रिया: दुख और चिंतास्थानीय सिख समुदाय में इस घटना ने निराशा फैला दी। कई भक्तों ने सोशल मीडिया पर दुख जताया और मर्यादा की रक्षा की मांग की। गुरुद्वारा कमेटी से उम्मीद है कि जल्द ही पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह घटना उत्तराखंड के धार्मिक संस्थानों में चुनावी प्रक्रियाओं पर बहस छेड़ सकती है।

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