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उत्तराखण्ड

जहाँ गंगा अपने पूर्ण वैभव के साथ बहती हो, जहां विभिन्न धर्मों के संगम और तीर्थ हों, ऐसी देवभूमि को भला कौन प्रणाम नहीं करना चाहेगा ?राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि)

जहाँ गंगा अपने पूर्ण वैभव के साथ बहती हो, जहां विभिन्न धर्मों के संगम और तीर्थ हों, ऐसी देवभूमि को भला कौन प्रणाम नहीं करना चाहेगा ? यही बात चरितार्थ हुई टिहरी के नरेंद्रनगर में गाला डिनर के दौरान आयोजित सांस्कृतिक संध्या के अवसर पर जब G -20 डैलिगेट्स को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, यहाँ के आथित्य -सत्कार और आध्यात्मिकता से परिचय कराया गया। जिसमें विदेशी मेहमान गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी संस्कृति के सांस्कृतिक प्रदर्शन तथा उत्तराखंड के तीर्थाटन, पर्यटन, यहां की ऐतिहासिकता तथा यहां की आध्यात्मिकता से अभिभूत हुए।
सांस्कृतिक संध्या की प्रस्तुति के दौरान भी एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य (One Earth, One Family and One Future) के संदेश की अभिव्यक्ति हुई। इस दौरान संदेश दिया गया कि वर्तमान समय में जिस तरह से जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है और पृथ्वी पर संसाधन कम हो रहे हैं, इसके चलते संपूर्ण मानवता के साथ-साथ प्रकृति के गहनों (जल, जंगल, वन्यजीव, कीट_ पतंग, सभी तरह के फ्लोरा और फौना) पर कोई दुष्प्रभाव ना पड़े तथा हम सभी का भविष्य संकट में ना पड़े, इसके लिए हम सभी को सामूहिक जिम्मेदारी लेनी होगी। इस एकमात्र जल और हरियाली युक्त ग्रह पृथ्वी पर हम सभी का भविष्य सुरक्षित रहे इसके लिए हमें राष्ट्र की सीमा से ऊपर उठकर एक परिवार की भांति प्रयास करने होंगे तथा मनुष्यता का परिचय देना होगा।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा G–20 की बैठक में पधारे समस्त डेलिगेट्स और अतिथियों का स्वागत किया गया।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने सभी डेलीगेट्स का स्वागत करते हुए कहा कि भारत की G-20 अध्यक्ष के रूप में गौरवशाली यात्रा सहज, सरल और सक्षम रूप से गतिमान है। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वपूर्ण तत्व है जो हर समाज की प्रगति के लिए आवश्यक होता है। विकासशील और सशक्त इंफ्रास्ट्रक्चर राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह समिति, G-20 देशों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर के विभिन्न पहलुओं पर मंथन और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है। प्रदेश में विकास कार्यों को करने के साथ साथ जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए भी कार्य किया है और साथ जन भागीदारी भी सुनिश्चित की है।

राज्यपाल ने कहा कि सरकार ने “स्मार्ट सिटी” और “वाइब्रेंट विलेज” जैसी योजनाओं का प्रारंभ किया है। एक ओर जहां ‘‘स्मार्ट सिटी योजना’’ शहरी क्षेत्रों को आधुनिकीकृत, सुरक्षित और सुसंगत बनाने के लिए उच्च तकनीकी और इंटेलिजेंट समाधानों का उपयोग करते हुए शहरों को सशक्त, सुरक्षित, पर्यावरण के अनुरूप बनाने की पहल है वहीं ‘‘वाइब्रेंट विलेज योजना’’ ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को सुदृढ़ करने के लिए सरकारी वित्तीय सहायता, संसाधनों की उपलब्धता और प्रशासनिक समर्थन प्रदान करती है। इसका मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि, स्वावलंबन और ग्रामीण-शहरी अंतर को कम करना है।

उन्होंने कहा कि नगरीय क्षेत्रों में भार ना बढ़े इसके लिए गांवों को भी मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है, हर व्यक्ति को पीने का स्वच्छ पानी मिले इसके लिए ‘‘हर घर नल, हर नल जल’’ जैसी योजनाएँ, नमामि गंगे योजना के अंतर्गत विभिन्न स्तरों में बने वाटर ट्रीट्मेन्ट संयत्रों के उपयोग से अब नदियों में दूषित जल प्रवाहित नहीं हो रहा हैl 

राज्यपाल ने कहा कि केंद्र सरकार के व्यापक सहयोग से उत्तराखण्ड में पर्यटन, परिवहन, बिजली आपूर्ति इत्यादि क्षेत्रों में प्रगति हुई है और अब हम इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तत्पर हैं। विश्व स्तरीय ‘‘ऑल वेदर रोड’’ प्रोजेक्ट का निर्माण होने से यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को भी अनेकों सुविधाएं मिली हैं, एक विस्तृत आधुनिक और सुरक्षित परिवहन नेटवर्क के विकास के माध्यम से यातायात को सुगम बनाया जा रहा है। आने वाले समय में “ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन” का कार्य पूर्ण होने पर पहाड़ पर भी रेल के माध्यम से यात्रा करने का सपना पूरा हो जाएगा। राज्यपाल ने विश्वास जताया कि इस महत्वपूर्ण बैठक से एक व्यापक और व्यावहारिक योजना तैयार होगी जो इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

अपने स्वागत संबोधन है मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उत्तराखंड का परम सौभाग्य है कि हमको जी-20 की तीन – तीन बैठकों की मेजबानी करने का सुअवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में योगा , आयुर्वेदा , हेल्थ एंड वैलनेस , फुटलूज इंडस्ट्री , तीर्थाटन, साहसिक पर्यटन इत्यादि में अपार संभावनाएं हैं । उन्होंने कहा कि मा. प्रधानमंत्री की प्रेरणा से उत्तराखंड में रोड , रोपवे , रेल आदि क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य और निर्माण कार्य हो रहे हैं तथा कनेक्टिविटी में तेजी से सुधार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपने प्राकृतिक सौंदर्य , विशिष्ट कल्चर,अनोखे आथित्य और आध्यात्मिकता की पवित्रता के लिए जाना जाता है तथा हमारी सरकार भी इसकी प्राकृतिक विशेषता को बरकरार बनाए रखने के लिए इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन पर आधारित प्रेरणा से कार्य कर रही है। भारत ने समूचे विश्व के सामने अपनी विविधतापूर्ण संस्कृति का परिचय कराने के साथ साथ ‘‘वसुधैव कुटंबकम” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः’’ की युक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है।

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