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उत्तराखण्ड

टिहरी लेक फेस्टिवल: राज्यपाल Lt Gen गुरमीत सिंह की मुख्य अतिथि भूमिका,,

टिहरी गढ़वाल, 8 मार्च 2026: उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने आज ‘द टिहरी लेक फेस्टिवल’ के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने कहा कि यह फेस्टिवल पर्यावरण संरक्षण, बारहमासी पर्यटन, स्थानीय संस्कृति और साहसिक खेलों के मजबूत संदेश देश-विदेश तक पहुंचाने में सफल रहा है। राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि इस आयोजन ने न केवल टिहरी की, बल्कि पूरे उत्तराखंड की अपार क्षमताओं को प्रमाणित किया है। विकसित भारत के संकल्प में उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने फेस्टिवल आयोजकों की सराहना की।चार दिवसीय आयोजन की भव्यता और विविधताराज्यपाल ने चार दिनों में 15 से अधिक प्रतियोगिताओं में साढ़े तीन हजार से ज्यादा प्रतिभागियों की भागीदारी को उत्साहजनक बताया। पहली बार फेस्टिवल का विस्तार और पर्यावरण, पर्यटन, संस्कृति जैसे विविध विषयों का समावेश उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया। हिमालयन ओ-टू (हाइमालयन ऑक्सीजन टू) को आयोजन से जोड़े जाने पर खुशी जताते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण का इससे बड़ा संदेश कुछ नहीं। छुंईं बाथ सत्र की चर्चाओं को पुस्तक रूप में संकलित करने की सलाह दी।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला शक्ति का बखानअंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने अपने संबोधन का प्रमुख हिस्सा पहाड़ी बेटियों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ की बेटियां मजबूत इच्छाशक्ति वाली और ऊंचे लक्ष्यों की धनी हैं। चार रोचक संस्मरणों के माध्यम से महिला शक्ति की मिसाल पेश की। सुर गंगा संगीत कला मंच की नाट्य प्रस्तुति की भी खूब तारीफ की।उत्तराखंड के पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर पर जोरभाषण में राज्यपाल ने जल, जंगल, जमीन से लेकर टिहरी के ऐतिहासिक महत्व और स्थानीय खाद्य पदार्थों, व्यंजनों को शामिल किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश का हवाला देते हुए कहा कि उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के अलावा बारहमासी पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य शीतकालीन, ग्रामीण, सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने में लगा है।पुरस्कार वितरण और सम्मान समारोहराज्यपाल ने पेंटिंग, मास्टर शेफ, ग्रुप फैशन शो, मिस्टर एवं मिसेज टिहरी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। जिला प्रशासन ने उन्हें पहाड़ी वाद्य यंत्र रणसिंगा से जुड़ा स्मृति चिन्ह भेंट किया। यह आयोजन उत्तराखंड के पर्यटन और सांस्कृतिक पटल पर नया आयाम जोड़ने वाला साबित हुआ।

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