उत्तराखण्ड
हल्द्वानी: गुरु अर्जन देव जी व गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा गुरु नानकपुरा में भव्य गुरमत समागम, हजारों संगत ने कीर्तन रस में भक्ति का आनंद लिया,,
पवनीत सिंह बिंद्रा
हल्द्वानी, 7 अप्रैल 2026 (विशेष संवाददाता):
उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में स्थित गुरुद्वारा गुरु नानकपुरा आज सिख इतिहास के दो महान प्रकाश पर्वों का साक्षी बना। पांचवें पातशाह साहिब श्री गुरु अर्जन देव जी (आदिगुरु ग्रंथ साहिब जी के संकलक व प्रथम शहीद गुरु) तथा नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी (धर्म रक्षक व कश्मीरी पंडितों के उद्धारक) के अवतरण दिवस को चढ़दी कला में मनाया गया। यह विशेष गुरमत समागम सेवक परिवार हल्द्वानी, स्थानीय साध संगत एवं गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया। आयोजन ने क्षेत्र में सिख समुदाय की एकजुटता व भक्ति परंपरा को मजबूत किया।
दोपहर का दीवान: कथा-कीर्तन से शुरू हुआ दिव्य समागम
आज सुबह 11 बजे आरंभ हुए कार्यक्रम की शुरुआत हेड ग्रंथी भाई साहिब ठाकुर सिंह जी की पवित्र कथा से हुई, जिसमें गुरुओं की शहादत व शिक्षाओं पर प्रकाश डाला गया। कथा के बाद हजूरी कीर्तनिए भाई प्रभु सिंह खालसा जी (गुरुद्वारा गुरु नानकपुरा) ने शबद कीर्तन से माहौल को आनंदमय बना दिया।
हल्द्वानी के होनहार नौजवानों—भाई जसपाल सिंह, दलजीत सिंह, तनप्रीत सिंह एवं वीरेंद्र सिंह (वीरू)—ने अपनी मधुर प्रस्तुति से संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष रूप से सेवक परिवार द्वारा आमंत्रित भाई शुभजीत सिंह जी (हजूरी कीर्तनिए, श्री दरबार साहिब अमृतसर) ने अपनी हाजिरी भरी। उनके कीर्तन के दौरान संगत ने सामूहिक रूप से शबद गाए, जिससे गुरुद्वारा परिसर गुरुवाणी के रस से सराबोर हो गया। दोपहर के दीवान की समाप्ति गुरु का अटूट लंगर प्रसाद से हुई, जहां सभी ने मिल-भरकर भोजन ग्रहण किया।
शाम का दीवान: पटियाला से बीबी जसप्रीत कौर का विशेष आगमन, परिक्रमा व श्लोक कीर्तन से निहाल होगी संगत
शाम 6 बजे से 10 बजे तक आयोजित होने वाले दीवान में विशेष आकर्षण रहेगा। पटियाला से पधार रही प्रसिद्ध कीर्तनिया बीबी जसप्रीत कौर जी 8:30 से 10 बजे तक अपनी मधुर वाणी से संगत को निहाल करेंगी। कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है:
7:45 से 8:00 बजे: नौजवान वीरों द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज की परिक्रमा चौकी।
8:00 से 8:30 बजे: नौवें महले के श्लोक कीर्तन—भाई जसपाल सिंह, दलजीत सिंह, जगजीत सिंह, अवनीत सिंह एवं समूह संगत द्वारा सामूहिक गायन।
दीवान समाप्ति पर गुरु का लंगर पुनः अटूट बरता जाएगा, जो सभी के लिए समान रूप से वितरित होगा।
आयोजन का महत्व व संदेश
यह समागम न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि गुरु साहिबान के बलिदान की याद दिलाता है। गुरु अर्जन देव जी ने आदि ग्रंथ संकलित कर सिख धर्म को मजबूत आधार दिया, जबकि गुरु तेग बहादुर जी ने धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अपना बलिदान दिया। हल्द्वानी जैसे शहर में ऐसे आयोजन सिख समुदाय को सांस्कृतिक रूप से जोड़ते हैं, खासकर उत्तराखंड में जहां सिख बिरादरी सक्रिय रूप से सामाजिक कार्यों में जुटी रहती है।
गुरुद्वारा गुरु नानकपुरा प्रबंधन कमेटी के मुख सेवादार रमनदीप सिंह सहनी जी एवं सेवक परिवार ने समूह संगत, नानक नाम लेवा भाइयों-बहनों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा, “गुरु की कृपा से यह समागम सफल हो, यही कामना है।”














