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उत्तराखण्ड

गैरसैंण बजट सत्र 2026: विपक्ष के हंगामे से शुरू हुआ उत्तराखंड विधानसभा सत्र, राज्यपाल अभिभाषण पर वॉकआउट,

,गैरसैंण (भराड़ीसैंण विधानसभा भवन): उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र आज जोरदार हंगामे के साथ शुरू हुआ। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से. नि.) के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस समेत विपक्ष ने सदन में नारेबाजी की, वेल में उतर आए और वॉकआउट कर दिया। यह सत्र ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार राज्यपाल संबोधन के ही दिन बजट पेश किया जाएगा। विपक्ष का जोरदार विरोध: ‘गवर्नर गो बैक’ के नारे गूंजेसत्र की शुरुआत सुबह 11 बजे राज्यपाल के अभिभाषण से हुई। जैसे ही अभिभाषण शुरू हुआ, कांग्रेस विधायकों ने सदन में खड़े होकर ‘राज्यपाल वापस जाओ’, ‘जन-दुश्मन सरकार’ जैसे नारे लगाए। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पुत्र प्रीतम सिंह, हरीश धामी, विक्रम सिंह नेगी, रवि बहादुर, अनुपमा रावत, मनोज तिवारी, सुमित हृदयेश समेत सभी विपक्षी सदस्य वेल में पहुंचे। उन्होंने पटल ठोकते हुए सत्र की मात्र 5 दिवसीय अवधि पर सवाल उठाए। वॉकआउट के बाद सदन बाहर प्रदर्शन हंगामे के बाद विपक्षी विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। बाहर यूकेडी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भारी प्रदर्शन किया, जिसमें बेरोजगारी, जोशीमठ आपदा, यूकेएसएसएससी घोटाला, युवाओं पर लाठीचार्ज जैसे मुद्दे उठाए गए। एक कार्यकर्ता ने तख्ती लाकर लिखा- ‘ट्रंप से अनुमति लेकर सत्र 30 दिन चलाइए’। पुलिस ने भारी सुरक्षा बल तैनात कर प्रदर्शनकारियों को दूर रखा। सत्र की छोटी अवधि पर विपक्ष का आरोपविपक्ष का मुख्य तर्क था कि 9 से 13 मार्च तक के 5 दिनों में जनहित के मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाएगी। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने सदन में शांति की अपील की और कहा कि सभी मुद्दों पर चर्चा का अवसर मिलेगा। हंगामे के बावजूद राज्यपाल ने अभिभाषण पूरा किया, जिसमें सरकार के ‘जन-जन की सरकार’ मॉडल, पारदर्शिता, विकास योजनाओं और बजट की झलक दी। बजट पेशी का ऐतिहासिक क्षण: 1.11 लाख करोड़ का अनुमानमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दोपहर 3 बजे वित्त मंत्री के नाते 2026-27 का बजट पेश करेंगे। यह पहला मौका है जब अभिभाषण के दिन ही बजट आएगा। बजट का आकार पिछले 1 लाख करोड़ से बढ़कर 1.11 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान। सत्र में 11 मार्च को मुख्य बजट चर्चा होगी। जनता के प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर सवालजनता द्वारा चुने गए विधायक सदन को सरकार के कामकाज की समीक्षा का मंच बनाते हैं, लेकिन आज का हंगामा चर्चा को बाधित करने वाला लगा। विपक्ष ने जनमुद्दों को उजागर किया, जबकि सरकार विकास पर फोकस का दावा कर रही। यह घटना राज्य की राजनीति में तीखे टकराव को रेखांकित करती है।

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