उत्तराखण्ड
आत्मज्ञान, मानवता और वैज्ञानिक दृष्टि का समन्वय,,
हल्द्वानी / कालाढूंगी, 08 मार्च 2026: संत निरंकारी मिशन के संयोजक क्षेत्र हल्द्वानी के तत्वावधान में कालाढूंगी के एक निजी बैंकेट हॉल में विशाल निरंकारी महिला संत समागम का आयोजन किया गया। इस समागम में संयोजक क्षेत्र हल्द्वानी की सभी ब्रांचों की महिलाओं ने भाग लिया।समागम को संबोधित करते हुए मिशन की प्रचारक बहन श्रीमती गीता आर्य जी ने कहा कि संत निरंकारी विचारधारा के अनुसार मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य आत्मज्ञान प्राप्त करना और परमात्मा की सच्ची पहचान करना है। संतों एवं सतगुरु की कृपा से ही मनुष्य को परमात्मा का वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है। आत्मज्ञान प्राप्त करने पर व्यक्ति के जीवन में प्रेम, नम्रता, सेवा और मानवता के गुण विकसित होते हैं। बिना इस ज्ञान के व्यक्ति अहंकार, भेदभाव और अज्ञान में भटकता रहता है।निरंकारी मिशन का संदेश है कि सभी मनुष्य एक ही परमात्मा की संतान हैं, इसलिए आपसी प्रेम, भाईचारा और समानता बनाए रखना आवश्यक है। संतों के उपदेश सिखाते हैं कि सच्चा धर्म बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता, अच्छे कर्म और मानव सेवा में है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का मन सांसारिक इच्छाओं व अहंकार में उलझा रहता है, लेकिन सतगुरु के मार्गदर्शन से आत्मचिंतन और आत्ममंथन करने पर मन की अशुद्धियां समाप्त होती हैं और व्यक्ति सच्चे ज्ञान की ओर अग्रसर होता है।समागम में संतों ने स्पष्ट किया कि आध्यात्मिक ज्ञान केवल धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सच्चाई से भी जुड़ा है। आधुनिक विज्ञान स्वीकार करता है कि ब्रह्मांड में एक अदृश्य ऊर्जा विद्यमान है, जो हर कण व जीव में मौजूद है। संतों की वाणी भी यही संकेत देती है कि परमात्मा सर्वव्यापी है।इस प्रकार निरंकारी मिशन संतों की शिक्षा से मानवता, समानता और प्रेम का संदेश प्रसारित करता है।





























