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उत्तराखण्ड

रावण–अंगद संवाद ने जीता दिल, शीशमहल में महिला रामलीला का नवें दिन भावुक ढंग से मनाया गया,,


हल्द्वानी। शीशमहल रामलीला मैदान में सेल्फ रिलायंस इनीशिएटिव (एसआरआई) संस्था द्वारा आयोजित महिला रामलीला के नवें दिन की लीला मंचन ने रावण–अंगद संवाद के साथ दर्शकों का दिल जीत लिया और मैदान में भारी भीड़ उतर आई। डायरेक्टर मुकेश कुमार जोशी के निर्देशन में रामायण के युद्धकांड की कुछ सबसे महत्वपूर्ण और भावुक लीलाएं मंचित की गईं, जिन्होंने न केवल धार्मिक भावनाओं को जगाया, बल्कि महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दिया।
रावण–अंगद संवाद से भावुक हुए दर्शक
लीला मंचन के दौरान रावण–अंगद संवाद (अंगद दूत लीला) का जोरदार प्रस्तुतीकरण किया गया। अंगद रावण की सभा में अपना पैर जमा देते हैं और रावण के अहंकार को चुनौती देते हैं कि कोई भी योद्धा उन्हें हिला नहीं सकता। रावण के सभी मंत्री और अंत में रावण स्वयं भी असफल रहते हैं, जिससे उसका अहंभाव चूर–चूर हो जाता है। अंगद अंतिम चेतावनी देकर राम के शिविर में वापस लौटते हैं और युद्ध भीषण रूप ले लेता है। यह दृश्य इतना जीवंत और भावुक था कि दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए।
लक्ष्मण शक्ति और संजीवनी बूटी की भावनात्मक लीला
लक्ष्मण शक्ति एवं मूर्छा की लीला में मेघनाद (इंद्रजीत) अपनी मायावी शक्तियों से लक्ष्मण पर “शक्ति” अस्त्र चलाता है, जिससे लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। राम का विलाप और वानर सेना में फैला शोक दर्शकों को भाव‑विभोर कर गया। लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए हनुमान जी को द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाने के लिए भेजा जाता है, जहाँ हनुमान जी पूरा पर्वत ही उठा लाते हैं और वैद्य सुषेण की सहायता से लक्ष्मण के प्राण बच जाते हैं। यह लीला भक्ति और भावनाओं का अनोखा मिश्रण थी, जिसने दर्शकों को गहराई से छुआ।
महिला सशक्तिकरण का साक्षात उदाहरण
मुख्य अतिथि भवाली व्यापार मंडल के अध्यक्ष व प्रमुख समाजसेवी नरेश पांडे, प्रवीण रौतैला और कपिल व्यास ने लीला मंचन को देखा। इस अवसर पर सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट श्री सरोज आनंद जोशी, श्रीमती निशा जोशी और रंगकर्मी विनय जोशी ने दीप प्रज्वलन कर लीला का विधिवत उद्घाटन किया और इसे महिला उत्थान व सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि धार्मिक व सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखना तथा नई पीढ़ी को रामायण के आदर्शों से जोड़ना यह आयोजन विशेष रूप से प्रेरणादायक है।
कलाकारों की भूमिकाएं और उपस्थित लोग
मंच संचालन रिम्पी बिष्ट ने किया। राम की भूमिका में मानसी रावत, लक्ष्मण में अंशिका जीना, हनुमान में तनुजा जोशी, रावण में दीपा कोश्यारी, सुग्रीव में नीलम लोहनी और जामवंत में भावना पोखरिया का अभिनय दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। इस दौरान सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट सरोज आनंद जोशी, निशा जोशी, विनय जोशी, पुरुष रामलीला कमेटी के प्रबंधक गिरीश चन्द्र तिवारी, मनोज कुमार तिवारी, दिनेश फुलारा, पुष्पा संभल, संगीत निर्देशक मोहन चन्द्र जोशी, तबलावादक कुश पांडे, महामंत्री कौशलेंद्र भट्ट, कामिनी पाल, इशिका शर्मा, योगिता बनोला, योगेन्द्र साहू, राधा मिश्रा, विमला ढंगवाल, सुरेंद्र रौतेला, योगेश भोज, हर्षवर्धन जोशी, मनोज गुणवंत, विकास राठौर, अजय कुमार, केशव दत्त, गौरव जोशी, वरिष्ठ अधिवक्ता मकरंद प्रताप सिंह, इशिका शर्मा, नारायण दत्त सनवाल सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे, जिन्होंने इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को सफल बनाया।

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