उत्तराखण्ड
सांसद अजय भट्ट ने रक्षा मंत्री को सौंपा DIBER हल्द्वानी को बचाने का पत्र,,
पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व नैनीताल-उधम सिंह नगर सांसद अजय भट्ट ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भेंट कर पत्र सौंपा। उन्होंने हल्द्वानी के रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (DIBER) की बंदी की स्थिति पर चिंता जताई और कुमाऊं-उत्तराखंड जनमानस के संशय को दूर करने की मांग की।
DIBER की वर्तमान दुर्दशा
सांसद ने बताया कि कुमाऊं क्षेत्र की सबसे बड़ी प्रयोगशाला DIBER को दिल्ली के DIPAS (रक्षा शरीरक्रिया अनुसंधान संस्थान) की परजीवी इकाई बना दिया गया है। इससे युवाओं के रोजगार (अप्रेंटिस, इंटर्नशिप, JRF, SRF), किसानों के कृषि परामर्श, व्यापारियों व उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हल्द्वानी में केवल कुछ कर्मचारी बचे हैं, जबकि कुल 300 एकड़ इंफ्रास्ट्रक्चर बेकार पड़ा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
DIBER की स्थापना 1962 भारत-चीन युद्ध के बाद हुई। यह हल्द्वानी (35-150 एकड़), अल्मोड़ा (70 एकड़), पिथौरागढ़, औली (40 एकड़) व हर्षिल (10 एकड़) तक फैली है। पूर्व निदेशक एम सी जोशी व अन्य वैज्ञानिकों से भेंट में सांसद को यह जानकारी मिली।
सांसद की प्रमुख मांगें
DIPAS को हल्द्वानी, पिथौरागढ़, औली, अल्मोड़ा व हर्षिल स्थानांतरित करें।
इंफ्रास्ट्रक्चर का समुचित उपयोग सुनिश्चित कर वित्तीय नुकसान रोका जाए।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वास्तविक अध्ययन संभव हो।
अपडेटेड स्थिति (मार्च 2026)
DRDO ने अक्टूबर 2025 में DIBER हल्द्वानी के लिए 18 अप्रेंटिस पदों की भर्ती निकाली, जो 16 नवंबर तक चली। संस्थान DIPAS का उप-संस्थान बने रहने के बावजूद सक्रिय है, लेकिन पूर्ण पुनरुद्धार की प्रतीक्षा।
















