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  • केसरवानी युवा वैश्य समिति हल्द्वानी के तत्वावधान में होली मिलन एवं सांस्कृतिक संध्या का आयोजन,,

    By March 16, 2025

    पवनीत सिंह बिंद्रा हल्द्वानी,,,केसरवानी युवा वैश्य समिति हल्द्वानी के तत्वावधान मे स्थानीय बैंकेट में होली मिलन...

  • योगी आदित्यनाथ ने किया ” जय माँ बगलामुखी ” पुस्तक का प्रयागराज में विमोचन ,,

    By March 1, 2025

    ,प्रयागराज महाकुंभ में नेत्र महाकुंभ के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ” जय...

  • निरंकारी मिशन के ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के तहत सफाई अभियानस्वच्छ जल, स्वच्छ मन की ओर एक सार्थक कदम,

    By February 23, 2025

    हल्द्वानी, – संत निरंकारी मिशन की सेवा भावना और मानव कल्याण के संकल्प को साकार करने...

  • निरंकारी मिशन के ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का तृतीय चरण,

    By February 21, 2025

    स्वच्छ जल, स्वच्छ मन की ओर एक सार्थक कदम हल्द्वानी, :- संत निरंकारी मिशन की सेवा...

  • हर्षोल्लास से मनाया जाएगा श्री श्याम वंदना मोहत्सव,,

    By February 17, 2025

    हल्द्वानी,,श्री श्याम मित्र मंडली के द्वारा चतुर्थ श्री श्याम वंदना महोत्सव दिनांक 22 फ़रवरी 2025 को...

  • हल्द्वानी राउंड टेबल 348के निशुल नेत्र जांच शिवर का किया आयोजन ,

    By February 15, 2025

    पवनीत सिंह बिंद्रा हल्द्वानी राउंड टेबल 348के निशुल नेत्र जांच शिवर का आयोजन राजकीय इंटर कॉलेज...

  • हमारा एक ही धर्म है मानवता,

    By February 10, 2025

    हमारा एक ही धर्म है मानवता हल्द्वानी ,आज तीन पानी में एक विशाल सत्संग का आयोजन...

  • सिक्ख फेडरेशन हल्द्वानी के सदस्यों ने श्री गुरु तेग बहादुर सीनियर सेकेंडरी स्कूल हल्द्वानी के बाहर हस्ताक्षर अभियान चलाया,,

    By February 10, 2025

    हल्द्वानी सिक्ख फेडरेशन हल्द्वानी के सदस्यों ने श्री गुरु तेग बहादुर सीनियर सेकेंडरी स्कूल हल्द्वानी के...

  • सारथी फाउंडेशन समिति के तत्वाधान मै माघ मास की खिचड़ी वितरण ,

    By February 8, 2025

    पवनीत सिंह बिंद्रा हलद्वानी ,सारथी फाउंडेशन समिति के खिचड़ी वितरण में पहुंचे मेयर गजराज बिष्ट ,...

  • भक्ति का सुगंध बिखेरते हुए 58वें निरंकारी सन्त समागम का सफलतापूर्वक समापन

    By January 28, 2025

    जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियों में नहीं बल्कि आत्मिक उन्नति में निहित है सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज हल्द्वानी ‘‘जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियों में नहीं बल्कि आत्मिक उन्नति में निहित है।’ये उद्गार निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने महाराष्ट्र के 58वें वार्षिक निरंकारी सन्त समागम के तीसरे एवं समापन दिवस पर लाखों की संख्या में उपस्थित मानव परिवार को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। इस तीन दिवसीय समागम का कल रात विधिवत रूप में सफलता पूर्वक समापन हो गया। सतगुरु माता जी ने आगे कहा कि मनुष्य जीवन को इसलिए ऊँचा माना गया है, क्योंकि इस जीवन में आत्मज्ञान प्राप्त करने की क्षमता है। परमात्मा निराकार है, और इस परम सत्य को जानना मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य होना चाहिए। अंत में सतगुरु माता जी ने फरमाया कि जीवन एक वरदान है और इसे परमात्मा के साथ हर पल जुड़कर जीना चाहिए। जीवन के हर पल को सही दिशा में जीने से ही हमें आत्मिक सन्तोष एवं शान्ति मिल सकती है, हम असीम की ओर बढ़ सकते हैं। इसके पूर्व समागम के दूसरे दिन सतगुरु माता जी ने अपने अमृत वचनों में कहा कि जीवन में भक्ति के साथ कर्तव्यों के प्रति जागरुक रहकर संतुलित जीवन जियें यह आवाहन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने पिंपरी पुणे में आयोजित 58वें वार्षिक निरंकारी सन्त समागम के दूसरे दिन शाम को सत्संग समारोह में विशाल रूप में उपस्थित श्रद्धालुओं को किया। सतगुरु माताजी ने फरमाया कि जैसे एक पक्षी को उड़ने के लिए दोनों पंखों की आवश्यकता होती है, वैसे ही जीवन में भक्ति के साथ साथ अपनी सामाजिक एवं पारिवारिक जिम्मदारियों को निभाना अति आवश्यक है। यदि कोई केवल भक्ति में ही लीन रहते हैं और कर्मक्षेत्र से दूर भागने का प्रयास करते हैं तो जीवन संतुलित बनना सम्भव नहीं। दूसरी तरफ भक्ति या आध्यात्मिकता से किनारा करते हुए केवल भौतिक उपलब्धियों के पीछे भागने से जीवन को पूर्णता प्राप्त नहीं हो सकती। सतगुरु माताजी ने आगे समझाया कि वास्तव में भक्ति और जिम्मेदारियों का निर्वाह का संतुलन तभी सम्भव हो पाता है जब हम जीवन में नेक नीयत, ईश्वर के प्रति निष्काम निरिच्छित प्रेम और समर्पित भाव से सेवा का जज्बा रखें। केवल ब्रह्मज्ञान प्राप्त करना काफी नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में अपनाना भी आवश्यक है। एक उदाहरण के द्वारा सतगुरु माता जी ने समझाया कि जैसे कोई दुकानदार अपने काम को पूरी ईमानदारी और संतुलन के साथ करता है, ग्राहक को मांग के अनुसार सही नापतोल करके माल देता है और उसका उचित मूल्य स्वीकारता है। अपने कार्य में पूरी तरह से संतुलन बनाए रखता है। इसी तरह भक्त परमात्मा से जुड़कर हर कार्य उसके अहसास में करता रहता है, सत्संग सेवा एवं सिमरण को प्राथमिकता देता है, यही वास्तविकता में भक्ति का असली स्वरूप है। इसके पहले आदरणीय निरंकारी राजपिता रमित जी ने अपने विचारों में कहा कि भक्ति का उद्देश्य परमात्मा के साथ एक प्रेमपूर्ण नाता जोड़ने का हो। इसके लिए संतों का जीवन हमारे लिए प्रेरणास्रोत होता है जो हमें अपनी आत्मा का मूल स्वरूप परमात्मा को जानकर जीवन का विस्तार असीम सच्चाई की ओर बढ़ाने की शिक्षा देता है। आपने बताया कि हमें अपनी आस्था और श्रद्धा को सच्चाई की ओर मोड़ना चाहिए और हर पल कदम में परमात्मा के प्रेम को महसूस करना चाहिए तभी सही मायनो में भक्ति का विस्तार सार्थक होगा। समागम की कुछ झलकियां कवि दरबार             समागम के तीसरे दिन एक बहुभाषी कवि दरबार का आयोजन किया गया जिसमें जिसका विषय था ‘विस्तार – असीम की ओर।’महाराष्ट्र के अतिरिक्त देश के विभिन्न स्थानों से आए हुए 21 कवियों ने मराठी, हिन्दी, अंग्रेजी, कोंकणी, भोजपुरी आदि भाषाओं में इस कवि दरबार में काव्य पाठ करते हुए मिशन के दिव्य सन्देश को प्रसारित किया। श्रोताओं द्वारा कवियों की भूरि भूरि प्रशंसा की गई।             मुख्य कवि दरबार के अतिरिक्त समागम के पहले दिन बाल कवि दरबार एवं दूसरे दिन महिला कवि दरबार का आयोजन लघु रूप में किया गया। इन दोनों लघु कवि दरबार कार्यक्रमों में मराठी, हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषाओं के माध्यम से 6 बाल कवि एवं 6 महिला कवियों ने काव्य पाठ किया जिसकी श्रोताओं द्वारा अत्यधिक प्रशंसा की गई।  निरंकारी प्रदर्शनी...